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Image: Two people arrested with drug

ऐसा तो नहीं था हमारा उत्तराखंड, देवभूमि को इस राक्षस की नजर लग गई !

ऐसा तो नहीं था हमारा उत्तराखंड, देवभूमि को इस राक्षस की नजर लग गई !

उत्तराखंड एक गिरफ्त में समाता जा रहा है। ये ऐसी गिरफ्त है, जिससे बच के निकलना बेहद मुश्किल है। ये जहर पूरे पंजाब को बर्बाद कर चुका है। ये जहर कई लोगों की जिंदगी लील कर चुका है। ये ही वो जहर है जिसने अब तक हजारों परिवारों में चीत्कारें मचा दी हैं। वो ही जहर धीरे धीरे देवभूमि की रगों में घुल रहा है। संभल जाइए कहीं देर ना हो जाए, अपने बच्चे पर नजर रखिए, अपने परिवार के सदस्यों की हरकतों पर नजर रखिए। हरिद्वार से लेकर ऋषिकेश, देहरादून से लेकर हल्द्वानी, नैनीताल से लेकर मसूरी तक ये जाल फैल गया है। हरिद्वार के बारे में आपको बता देते हैं। इस जिले में नशीली दवाओं की अवैध सप्लाई हो रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से नशीली दवाओं की खेप भेजी जा रही है। ऐसी ही एक खेप लेकर ऋषिकेश पहुंचे दो युवकों को पुलिस ने गुरफ्तार कर दिया। दोनों के पास हजारों नशीले कैप्सूल, इंजेक्शन और नशीले सिरप मिले।

इस नशे के जखीरे की कीमत करीब पौने दो लाख रुपये बताई जा रही है। इसके अलाव इन दोनों से साढ़े चार लाख रुपये कैश भी बरामद किया गया है। ये रकम इन दोनों ने नशीली दवा बेचकर जमा की थी। इससे पहले देहरादून में एक बड़ा खुलासा हुआ था। सेलाकुई की एक मसाला फैक्ट्री से नशे के सिरप की 28 पेटियां मिली थीं। एक हफ्ते के भीतर दूसरी बार नशीली दवाओं का जखीरा पकड़ा गया है। पुलिस के कान खड़े हो गए हैं। एसएसपी निवेदिता कुकरेती का कहना है कि ऋषिकेश में दो युवक स्कूटी पर प्लास्टिक की बोरी लादकर आइडीपीएल चौकी की तरफ जा रहे थे। पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोका तो दोनों युवक घबरा गए। इसके बाद पुलिस ने बोरों को खोलकर देखा तो उसमें नशीली दवा भरी हुई थीं। युवकों से दवाओं की खरीद और सप्लाई के कागजात मांगे गए तो वो बगलें झांकने लगे। पुलिस को शक हुआ तो पूछताछ की गई।

इसके बाद युवकों को थाने लाया गया। तब दोनों ने बताया कि वो पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई जिलों के थोक दवा विक्रेताओं से नशे की दवाएं खरीदकर उन्हें देहरादून, रुड़की, हरिद्वार और बाकी जिलों में बेचते हैं। ये दोनों रुड़की और हरिद्वार में साढ़े चार लाख रुपये की नशीली दवाएं बेचकर ऋषिकेश पहुंचे थे। दोनों के पास 41 हजार 660 नशीले कैप्सूल मिले है। इसके अलावा 1936 इंजेक्शन और 117 बोतल सिरप मिलीं। बताया जा रहा है कि ये दवा ऋषिकेश के कुछ हॉस्टलों में बेची जानी थी। इसके साथ ही पुलिस को इन दोनों से कुछ और जानकारियां भी हाथ लगी हैं। सवाल ये है कि आखिर उत्तराखंड ये किस रास्ते पर चल रहा है ? देवभूमि कहे जाने वाले इस राज्य में आखिर कब एक बड़ा अभियान चलाकर नशे की खेप को बंद किया जाएगा ? ये तो आने वाला वक्त ही तय करेगा।

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