देवभूमि का प्राचीन सूर्य मंदिर, जहां सरकारों ने भी सिर झुकाया, घोषित हुआ राष्ट्रीय संपदा (Katarmal surya mandir in almora )
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देवभूमि का प्राचीन सूर्य मंदिर, जहां सरकारों ने भी सिर झुकाया, घोषित हुआ राष्ट्रीय संपदा

देवभूमि का प्राचीन सूर्य मंदिर, जहां सरकारों ने भी सिर झुकाया, घोषित हुआ राष्ट्रीय संपदा

उत्तराखंड में कई स्थान ऐसे हैं, जो आज भी यहां आने वाले लोगों को हैरान कर देते हैं। आपने आज तक सुना होगा कि दुनिया में एकमात्र सूर्य मंदिर सिर्फ उड़ीसा के कोणार्क में है। कोणार्क का सूर्य मंदिर अपनी बेजोड़ वास्तुकला के लिए भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कोणार्क के बाद दूसरा सूर्य मंदिर उत्तराखण्ड राज्य में है। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के कटारमल गांव में ये मंदिर है। ये मंदिर 800 साल पुराना है। ये मंदिर हमारे पूर्वजों की सूर्य के प्रति आस्था का प्रमाण है, ये मंदिर बारहवीं शताब्दी में बनाया गया था, जो अपनी बनावट एवं चित्रकारी के लिए विख्यात है। ये मंदिर उत्तराखण्ड के गौरवशाली इतिहास का प्रमाण है। महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने इस मन्दिर के बारे में लिखा था कि ‘’यहाँ पर समस्त हिमालय के देवतागण एकत्र होकर पूजा-अर्चना करते रहे हैं।’’

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इस मन्दिर में सूर्य पद्मासन लगाकर बैठे हुए हैं। बताया जाता है कि कत्यूरी साम्राज्य में राजा कटारमल देव ने इसका निर्माण कराया था। इस मंदिर में मुख्य प्रतिमा सूर्य की है जो 12वीं शती में निर्मित है। इसके अलावा शिव-पार्वती, लक्ष्मी-नारायण, नृसिंह, कुबेर, महिषासुरमर्दिनी आदि की कई मूर्तियां गर्भगृह में रखी हुई हैं। इस सूर्य मंदिर का लोकप्रिय नाम बारादित्य है। पूरब की ओर रुख वाला ये मंदिर कुमाऊं क्षेत्र का सबसे बड़ा और सबसे ऊंचा मंदिर है। कहा जाता है कि यहां श्रद्धा, प्रेम और भक्तिपूर्वक मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है। भक्तों का मानना है कि इस मंदिर के दर्शन मात्र से ही हृदय में छाया अंधकार दूर होने लगता है। ऎसा कहा जाता है कि देवी-देवता यहां भगवान सूर्य की आराधना करते थे। इसलिए राहुल सांस्कृतायन ने इस बारे में अपनी राय रखी थी।

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आस्थावान लोग इस मंदिर में आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यों में हमेशा बढ़-चढ़ कर अपनी भागीदारी दर्ज करवाते हैं। इस ऎतिहासिक प्राचीन मंदिर को सरकार ने प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्व स्थल घोषित कर राष्ट्रीय सम्पत्ति घोषित कर दिया है। मंदिर में स्थापित अष्टधातु की प्राचीन प्रतिमा को मूर्ति तस्करों ने चुरा लिया था, जो इस समय राष्ट्रीय पुरातत्व संग्रहालय, नई दिल्ली में रखी गई है। साथ ही मंदिर के लकड़ी के सुन्दर दरवाजे भी वहीं पर रखे गये हैं, जो अपनी विशिष्ट काष्ठ कला के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। कटारमल सूर्य मन्दिर तक पहुँचने के लिए अल्मोड़ा से रानीखेत मोटरमार्ग के रास्ते से जाना होता है। अल्मोड़ा से 14 किमी जाने के बाद 3 किमी पैदल चलना पड़ता है। ये मन्दिर 1554 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। अल्मोड़ा से कटारमल मंदिर की कुल दूरी 17 किमी के लगभग है।

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