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Image: Terrible earthquake warning for uttarakhand

उत्तराखंड के लिए सच साबित हो रही है वैज्ञानिकों की चेतावनी, भूकंप से फिर हिली धरती

उत्तराखंड के लिए सच साबित हो रही है वैज्ञानिकों की चेतावनी, भूकंप से फिर हिली धरती

भूकंप अफगानिस्तान ने आया थआ, लेकिन धरती उत्तराखंड की भी हिली। दिल्ली एनसीआर में भूकंप के बाद उत्तराखंड में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। आपदा प्रबन्धन का कहना है कि भूकंप का झटका 6.2 रिक्टर स्केल का था। इस भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान, तजागिस्तान बॉर्डर में हिंदुकुश श्रृंखला पर था। आपको याद होगा कि भारत और हिमालय में बड़े भूकंप को लेकर वैज्ञानिक पहले से ही चेतावनी जारी कर चुके हैं। अगर ऐसा ही रहा तो कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है, ये वैज्ञानिकों का कहना है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने एक बड़ी चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा है कि उत्तराखंड में भी कई जगह भूकंप के झटकों से भूस्खलन जोन बढ़ रहे हैं। वैज्ञानिकों ने फिर चेताया है कि इस वजह से हिमालय क्षेत्र की डेमोग्राफी में बदलाव आ सकता है। भूकंप और भूस्खलन और भूकंप के मद्देनजर इलाकों को चिह्नित करने की सलाह दी गई है।

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इसके साथ ही वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान ने इस बारे में गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र के भूस्खलन जोन के की रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट को कैंद्र सरकार के पास भेज दिया गया है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने साल 2013 की आपदा के बाद सामने आ रही स्थिति की रिपोर्ट को भी उत्तराखंड शासन को भी सौंपा था। इस रिपोर्ट में सरकार से इस बारे में गंभीरता दिखाने के लिए कहा गया है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ईसी मोड के बैनर तले कैलाश-मानसरोवर रास्ते पर भूस्खलन को लेकर संवेदनशील इलाकों को चिन्हित करने काम शुरू किया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि भूकंप के लिहाज से मोहांद-सहारनपुर से लेकर जम्मू-कश्मीर तक पूरा हिमालय संवेदनशील जोन में है। फॉल्ट लाइन वाले इलाको को ज्यादा संवेदनशील माना गया है। इसके अलावा भी कुछ और बातें हैं।

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वैज्ञानिकों का इसके साथ ही कहना है कि यहां बड़ा भूकंप आए 7 साल से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है। इसलिए इस क्षेत्र में बड़ी मात्रा में भूगर्भीय ऊर्जा जमा हो गई है। रिसर्च कहती है कि अगर रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6 हो, तो इससे हिरोशिमा में गिरे एक एटम बम जितनी ऊर्जा निकलती है। इसके साथ ही अगर ये तीव्रता 8 से ज्यादा हो तो, हिरोशिमा जैसे 900 एटम बम जितनी ऊर्जा निकलेगी। वैज्ञानिकों ने कहा है कि अगर भूकंप आया तो पर्वतीय क्षेत्रों से ज्यादा तराई क्षेत्रों को भयंकर नुकसान होगा। देहरादून और मसूरी को ज्यादा झटका लगेगा। कुछ वक्त पहले उत्तराखंड आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बैनर तले दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। पहले दिन वैज्ञानिक सेशन में बड़े भूकंप का खतरा बताया गया था।

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