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Image: Wear pahadi pride pahadi topi by sameer shukla

उत्तराखंड की शान को अपने सिर पर सजाइए, ये पहाड़ी टोपी पहनकर कहिए ‘मी उत्तराखंडी छूं’

उत्तराखंड की शान को अपने सिर पर सजाइए, ये पहाड़ी टोपी पहनकर कहिए ‘मी उत्तराखंडी छूं’

वक्त बदल रहा है, समय चक्र घूम रहा है और इस चक्र के साथ-साथ बदलते क्रम को हम उत्तराखंडियों ने तहेदिल से स्वीकार भी किया है। एक खास बात जरूर रही है कि हम अपनी परंपराओं और अपनी संस्कृति के साथ ही आगे बढ़ना पसंद करते हैं। वक्त का सीधा कनेक्शन फैशन से भी है और इस बीच कुछ परंपरागत परिधान आज भी हमारे लिए हमारी थाती हैं। वक्त और परिधानों की दौड़ में पहाड़ी फैशन को साथ रखना चाहते हैं आप ? अगर हां तो आपके लिए बेहतरीन सा तोहफा है। वो तोहफा है ये पहाड़ी टोपी। बुजुर्गों ने जिसे अपने सिर पर सजाया और उसी सिलसिले को आगे बढ़ाने का काम किया है समीर शुक्ला और कविता शुक्ला जी ने। समीर शुक्ला और कविता शुक्ला ने पहाड़ की संस्कृति को संजोने, उसे बचाने और आगे बढ़ाने के लिए अभूतपूर्व पहल की शुरुआत की थी।

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दोनों ने अपनी जिंदगी के तमाम अनुभवों को झोंक दिया। एक ऐसी टोपी तैयार की है, जो हर उत्तराखंडी के लिए शान है, तो सारी दुनिया के लिए फैशन का नया अवतार है। पहाड़ की परंपरा से सजी ये टोपी देखने में बेहद ही खूबसूरत है। किनारे पर बनी रंगीन धारियां और राज्य पुष्प ब्रह्मकमल तो इसमें संजीदगी से सजाया गया है। उत्तराखंड के उन तमाम युवाओं के सिर पर ये टोपी सजी है, जो प्रदेश की संस्कृति और कला के लिए काम कर रहे हैं। पारंपरिक परिधान को नए फैशन के मुताबिक ढालकर समीर शुक्ला और कविता शुक्ला जी ने यादगार काम किया है। समीर शुक्ला और उनकी पत्नी कविता शुक्ला मसूरी में ‘सोहम हैरिटेज एंड आर्ट सेंटर’ चलाते हैं। हाल ही में उत्तराखंड के बेहतरीन गीतकार और संगीतकार शाश्वत पंडित को पहाड़ी टोपी का ब्रान्ड आइकन बनाया गया है।

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शाश्वत पंडित ने खुशी जताते हुए कहा कि ‘’मुझे ये बताते हुए गर्व की अनुभूति हो रही है कि,आप सभी के प्यार और आशीर्वाद से मुझे "पहाड़ी टोपी" का ब्रांड आइकन चुना है’’। इसके साथ ही शाश्वत ने इसकी एक तस्वीर भी अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट की है। खास बात ये है कि आप सिर्फ 275 रुपये से 400 रुपये तक के बीच में इस टोपी को खरीद सकते हैं। इसके लिए आप फिलहाल मसूरी का रुख कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि मार्च के आखिर तक आप अपने स्थानीय बाजार से भी इस टोपी को खरीद सकेंगे। वैसे आपके पास भी गर्व करने का एक शानदार मौका है। यकीन मानिए इस टोपी को एक बार अपने सिर पर सजा लेगें तो इससे दिल लग जाएगा। बेहतरीन कोशिश को है समीर शुक्ला जी और कविता शुक्ला जी की। यकीन मानिए आज के दौर में उत्तराखंड को वास्तव में ऐसे लोगों की जरूरत है, जो यहां की बहुमूल्य थातियों को संजोकर रखें।

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