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Image: Sex Ratio going horibly down in uttarakhand

जन्म लिंगानुपात में पूरे देश में केवल हरियाणा के ऊपर उत्तराखंड : नीति आयोग

जन्म लिंगानुपात में पूरे देश में केवल हरियाणा के ऊपर उत्तराखंड : नीति आयोग

सावधान उत्तराखंड ! बेटियों के अस्तित्व पर संकट बढ़ता जा रहा है। इसे विडंबना नहीं तो और क्या कहेंगे कि एक तरफ तो दिखाने के लिए में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की चौतरफा गूंज है, और असल में जमीनी हक़ीक़त कुछ और ही है। देवभूमि कही जाने वाली उत्तराखंड में धरातल पर देखें तो सच्चाई झखजोरने वाली है। हमारी बेटियों के अस्तित्व पर संकट और गहराने लगा है। दरअसल नीति आयोग की नवीनतम रिपोर्ट में यह साफ़ हुआ है कि भारत वर्ष में हरियाणा के बाद उत्तराखंड की हालत सबसे दयनीय है। इसकी तस्दीक करते हुए नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट कहती है कि उत्तराखंड में जन्म के समय लिंगानुपात (प्रति हजार बालकों पर बालिकाओं की संख्या) में 27 अंक की गिरावट दर्ज की गई है।

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नीति आयोग की इस रिपोर्ट में जन्म दर को आधार बनाते हुए यह स्पष्ट हुआ है कि उत्तराखंड में प्रति 1000 बालकों पर बच्चियों की संख्या 871 पर खिसक गई है। हालांकि जन्म दर से इतर जनगणना 2011 में किए गए विस्तृत सर्वे की बात करें तो 0-6 वर्ष तक ki आयु में लिंगानुपात 886 था। यानी इस अंतराल में ही लिंगानुपात में 15 अंक की गिरावट आ गई है। वर्ष 2011 की जनगणना के हिसाब से आकलन करें तो पता चलता है कि लिंगानुपात की दर में 42 अंकों की कमी आ चुकी है। वर्तमान में जन्म के समय लिंगानुपात में हम सिर्फ हरियाणा से ही आगे हैं, बल्कि यह अंतर भी महज 13 अंक का है। हालात ऐसे ही रहे तो हमारी स्थिति हरियाणा से भी बदतर हो जाएगी।

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यहां सबसे चौकाने वाली बात यह है कि उत्तराखंड में लिंगानुपात स्तर हमेशा से निम्न नहीं था। कुल लिंगानुपात (महिला-पुरुष) की बात करें तो जनगणना 2011 में यह संख्या 963 थी। जबकि, 2001 में उत्तराखंड 1 अंक नीचे 962 पर था। महज ८ सालों में यह उम्मीद कत्तई नहीं थी। बल्कि उत्तराखंड में तो सदा से बेटियों को सम्मान दिए जाने की परंपरा होने के कारण जन्म के समय लिंगानुपात में स्थिति और बेहतर होनी चाहिए थी। रिपोर्ट की मानें तो उम्मीद के उलट हमारी बेटियों के अस्तित्व पर संकट बढ़ता जा रहा है। "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" जैसी "टैग-लाइन्स" देने से ही सुधार होता दिख नहीं रहा। ऐसे में देखना ये है कि त्रिवेंद्र सरकार गिरते लिंगानुपात पर अंकुश लगाने के लिए क्या कदम उठती है।

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