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Image: quick action will be taken on forest fire

इस तरह आसमान से रखी जाएगी जंगलों की आग पर नजर, होगा त्वरित एक्शन

इस तरह आसमान से रखी जाएगी जंगलों की आग पर नजर, होगा त्वरित एक्शन

हर वर्ष गर्मी बढ़ने के साथ ही उत्तराखण्ड में जंगलों की आग से बहुत बड़े पैमाने पर प्रदेश की वन संपदा खाक हो जाती है। जंगलों की आग से पार पाने की चुनौती हर बार की तरह फिर से आ खड़ी हुई है। यद्यपि दावानल से पार पाने के लिए विभाग का दावा है कि इस बाबत पूरी तैयारियां कर ली गयी हैं, परन्तु इस बार एक कदम आगे बढ़ते हुए विभाग का ध्यान इस सम्बन्ध में त्वरित सूचनाएं जुटाने पर है। अभी वन विभाग को भारतीय वन सर्वेक्षण से जी.पी.एस. पर आधारित फायर अलर्ट मिलता है जिसे वन विभाग अपने Information Technology सिस्टम के जरिए प्रभावित क्षेत्र का पता लगाकर इसकी सूचना अपने फील्ड स्टाफ तक पहुंचाता है। कहा जा रहा कि योजना के परवान चढ़ने पर सबसे अधिक लाभ उत्तराखण्ड के राजाजी नेशनल पार्क को होगा। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि दिल्ली-देहरादून के बीच रोजाना होने वाली नियमित उड़ानें ठीक राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर से आती-जाती हैं।

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उत्तराखंड में उड़ान भरते हवाई जहाज और हेलीकॉप्टरों के पायलट अब जंगल की आग पर भी निगाह रखेंगे। इस कड़ी में दावानल (जंगल की आग) पर नियंत्रण के मद्देनजर प्रदेश के वन विभाग सिविल एविएशन का सहयोग लेने की पूरी तैयारी में है। बहुत जल्द ही इस योजना का ब्लू प्रिंट तैयार कर इसे राज्य के मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुत किये जाने पर विचार किया जा रहा है, जहां से Green Signal मिलते ही डायरेक्टर जनरल सिविल एविएशन (DGCA) को इस बाबत प्रस्ताव भेजा जाएगा। इस योजना के परवान चढ़ने पर दिल्ली-देहरादून के बीच रोजाना संचालित 12 हवाई सेवाओं के साथ ही चारधाम यात्रा के दौरान करीब डेढ़ दर्जन कंपनियों की हेलीकॉप्टर सेवाओं के पायलट उड़ान के दौरान कहीं भी जंगल में धुंआ उठता नजर आने पर तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी जा सकेगी।

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अपने सूचना तंत्र को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रदेश के वन विभाग अब उत्तराखण्ड में उड़ान भरने वाले विमानों के पायलटों का सहयोग लेने की तैयारी कर रहा है। वर्तमान में दिल्ली-देहरादून के बीच रोजाना नियमित रूप से 12 उड़ाने हैं। इसके अलावा चारधाम यात्रा प्रारंभ होने पर करीब डेढ़ दर्जन हेली कंपनियां हेलीकॉप्टर सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री के साथ ही राज्य के मंत्री और अधिकारी भी हेलीकॉप्टर से राज्य के दौरों पर निकलते हैं। उत्तराखंड के प्रमुख वन संरक्षक श्री जयराज के अनुसार विमानों में एक जी.पी.एस. सिस्टम होता है और आसमान से कहीं भी जंगल में धुंआ नजर आने पर पायलट इसकी सूचना दे सकते हैं। इस सूचना के आधार पर संबंधित क्षेत्र में आग बुझाने को तुरंत कदम उठाए जा सकेंगे। उन्होंने बताया कि इस योजना के संबंध में जल्द ही प्रदेश के मुख्य सचिव से वार्ता की जाने की योजना है।

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