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Image: Tigers increasing in uttarakhand

उत्तराखंड देश में दूसरे नंबर पर, बढ़ रहा है बाघों का कुनबा, दुनियाभर के वन्य जीव प्रेमी खुश

उत्तराखंड देश में दूसरे नंबर पर, बढ़ रहा है बाघों का कुनबा, दुनियाभर के वन्य जीव प्रेमी खुश

एक तरफ दुनिया से बाघों का कुनबा लगातार खत्म हो रहा है, लेकिन दूसरी तरफ उत्तराखंड ने इस मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। बताया जा रहा है कि उत्तराखंड में बाघों का कुनबा खूब फल-फूल रहा है। हाल ही में इसकी रिपोर्ट सामने आई है। 'अखिल भारतीय बाघ आकलन-2018' के तहत चल रही गणना के दौरान ये रुझान मिले हैं। इसके बाद से वन्य जीव विशेषज्ञों में उत्साह देखने को मिल रहा है। खासतौर पर देवभूमि में बाघों के कुनबा लगातार बढ़ रहा है। गणना के नोडल अधिकारी एवं अपर प्रमुख मुख्य वन संरक्षक ने इस बारे में मीडिया को कुछ खास बातें बताई हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में साल 2017 के दौरान बाघों की संख्या 361 थी। इस बार ये आंकड़ा 400 के पार पहुंच गया है। खास बात ये है कि बाघों की तादाद के मामले में देश में कर्नाटक के बाद उत्तराखंड का नंबर है। बाघों की गणना फरवरी में शुरू कर दी गई थी और ये अभी जारी है।

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कार्बेट नेशनल पार्क और राजाजी नेशनल पार्क के आसपास के 12 वन प्रभागों को इसमें शामिल किया गया है। पहले चरण में बाघ के फूट प्रिंट्स का डाटा तैयार किया गया है, जिसके बाद सभी उत्साहित है। बताया जा रहा है कि इसकी फीडिंग का काम भी लगभग पूरा कर लिया गया है। दूसरे फेज़ में अब कैमरों के जरिए बाघों की गणना की जा रही है। इसके लिए करीब 1200 कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रदेश में 15 मार्च को ही कैमरे लगाने का काम पूरा हुआ है। 25 मार्च तक तमाम कैमरों के जरिए ली गई तस्वीरों को जमा किया जाएगा। बताया गया है कि तस्वीरों का मिलान कराने के बाद ही किसी बड़े निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। इसके साथ ही फूट प्रिंट्स के विश्लेषण का काम भी लगातार जारी है। भारी संख्या में मिले फूट प्रिट्स को देखकर वन्यजीव विशेषज्ञ खासे उत्साहित हैं।

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अधिकारियों का कहना है कि कैमरे से मिली तस्वीरें संकेत दे रही हैं कि यहां बाघों की तादात लगातार बढ़ रही है। खास बात ये है कि राजाजी नेशनल पार्क के ऐसे क्षेत्रों में भी बाघों की उपस्थिति दर्ज हुई है, जहां कभी वो देखे भी नहीं गए थे। इसके अलावा अभी उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भी बाघ की चहल कदमी नजर आई है। इसके बाद यहां भी बाघों की गणना कराई जानी है। बताया जा रहा है कि ये गणना गर्मियों में कराई जाएगी। कुछ और भी खास बातें हैं। अपर प्रमुख मुख्य वन संरक्षक का कहना है कि इस मामले में भारतीय वन्यजीव संस्थान से मदद ली जा रही है। केदारनाथ, टिहरी के खतलिंग ग्लेशियर, अस्कोट और मदमहेश्वर जैसे 12 से 14 हजार फुट की ऊंचाई पर भी कैमरा ट्रैप में बाघों की तस्वीरें कैद हो रही हैं। जाहिर है कि इनकी सही संख्या का पता लगना जरूरी है। वैज्ञानिकों में खुशी की लहर है।

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