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Image: dhari devi temple shrinagar garhwal

Pics: देवभूमि की मां धारी, चारों धामों की रक्षक हैं मां भगवती...तस्वीरें देखिए

Pics: देवभूमि की मां धारी, चारों धामों की रक्षक हैं मां भगवती...तस्वीरें देखिए

चारधाम यात्रा प्रारंभ होने वाली है। चारधाम यात्रा मार्ग पर श्रीनगर से करीब 14 किमी दूरी पर प्राचीन सिद्धपीठ धारी देवी मंदिर स्थित है। यहां प्राचीन मंदिर बांध की झील में डूब गया है जिस कारण काली माँ के स्वरूप धारी देवी की प्राचीन प्रतिमा को उसी स्थान पर अपलिफ्ट कर फिलहाल अस्थायी मंदिर में स्थापित किया गया है। नवीन मंदिर निर्माण का कार्य जल्द ही संपन्न होने पर माँ धारी कि पुनः स्थापना नवीन मंदिर में की जाएगी। बांध की झील के ठीक बीचों-बीच अब नए मंदिर का निर्माण चल रहा है। माँ धारी को देवभूमि उत्तराखंड के रक्षक के रूप में जाना जाता है। भारत में कई चमत्कारों के बारे में आपने सुना होगा। ऐसा ही एक चमत्कार धारी देवी के मंदिर में भी देखने को मिलता है। इस मंदिर में रोजाना माता तीन रूप बदलती है। मां प्रात:काल कन्या, दोपहर में युवती और शाम को वृद्धा का रूप धारण करती हैं। कालीमठ एवं कालीस्य मठों में माँ काली की प्रतिमा क्रोध मुद्रा में है, परन्तु धारी देवी मंदिर में काली की प्रतिमा शांत मुद्रा में स्थित है।लेकिन शांत मुद्रा में दिखने वाली धारी माता के गुस्से को दुनिया ने उस वक्त देखा, जब एकाएक देवभूमि पानी में समा गई। लोगों का कहना था कि प्रतिमा हटाने के कुछ घंटे के बाद ही उत्तराखंड आपदा आई थी।

श्रीनगर से 14 किमी दूरी पर स्थित है प्राचीन सिद्धपीठ धारी देवी मंदिर

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1. उत्तराखंड में श्रीनगर से करीब 14 किमी दूरी पर प्राचीन सिद्धपीठ धारी देवी मंदिर स्थित है। मान्यता अनुसार मां धारी उत्तराखंड के चारधाम की रक्षा करती है। इस देवी को पहाड़ों और तीर्थयात्रियों की रक्षक देवी माना जाता है। मंदिर में मूर्ति जागृत और साक्षात है। यह सिद्धपीठ श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र है। जनश्रुति है कि यहां मां काली प्रतिदिन तीन रूप प्रात: काल कन्या, दोपहर युवती और शाम को वृद्धा का रूप धारण करती हैं। मौजूदा समय में बांध से मंदिर का मूल स्थान डूब गया है।

अपलिफ्ट कर अस्थायी मंदिर में स्थापित की गई है मां धारी देवी की मूर्ति

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2. मां धारी देवी का मंदिर अलकनंदा नदी पर बनी 330 मेगावाट श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की झील से डूब प्रभावित क्षेत्र में आ गया। यहां से मां काली का रूप माने जाने वाली धारा देवी की प्रतिमा को 16 जून 2013 की शाम को हटाया गया। उस दौरान कुछ लोगों का कहना था कि प्रतिमा हटाने के कुछ घंटे के बाद ही उत्तराखंड में आपदा आई थी। मौजूदा समय में बांध से मंदिर का मूल स्थान डूब गया है। मूल स्थान से अपलिफ्ट कर अस्थायी मंदिर में मां धारी देवी की मूर्ति स्थापित की गई है। इसी स्थान पर अब स्थायी मंदिर का निर्माण चल रहा है।

प्राचीन काल से उत्तराखण्ड की रक्षा करती है माँ धारी

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3. माँ धारी देवी प्राचीन काल से उत्तराखण्ड की रक्षा करती है, सभी तीर्थ स्थानों की रक्षा करती है । माँ धारी देवी मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है । साल 1807 से इसके यहां होने का साक्ष्य मौजूद है । पुजारियों और स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर इससे भी पुराना है । 1807 से पहले के साक्ष्य गंगा में आई बाढ़ में नष्ट हो गए हैं । 1803 से 1814 तक गोरखा सेनापतियों द्वारा मंदिर को किए गए दान अभी भी मौजूद है । इस मंदिर में पूजा अर्चना धारी गांव के पंडित कराते हैं । यहां के तीन पंडित भाई चार -चार महीने पूजा कराते हैं । यहां के पुजारी बताते हैं कि द्वापर युग से ही काली की प्रतिमा यहां स्थित है।

कलियासौड़ के समीप स्थित है मां धारी देवी का मंदिर

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4. ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर श्रीनगर से कुछ दूरी पर कलियासौड़ के समीप मां धारी देवी का मंदिर स्थित है। ऋषिकेश से मंदिर करीब 115 किमी की दूरी पर है। धारी देवी को मां शक्ति के रूप महाकाली के रूप में पूजा जाता है। मान्यता अनुसार मां धारी उत्तराखंड के चारधाम की रक्षा करती है। इस देवी को पहाड़ों और तीर्थयात्रियों की रक्षक देवी माना जाता है। मंदिर में मूर्ति जागृत और साक्षात है। यह सिद्धपीठ श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र है। धारी गांव के पांडेय ब्राह्मण मंदिर के पुजारी हैं।

दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है देवी माता

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5. भारत में कई चमत्कारों के बारे में आपने सुना होगा। ऐसा ही एक चमत्कार धारी देवी के मंदिर में भी देखने को मिलता है। इस मंदिर में देवी माता दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है। देवभूमि उत्तराखंड के रक्षक के रूप में धारी देवी को जाना जाता है। इस मंदिर में रोजाना माता तीन रूप बदलती है। मां प्रात:काल कन्या, दोपहर में युवती और शाम को वृद्धा का रूप धारण करती हैं।

धारी देवी मंदिर में काली की प्रतिमा शांत मुद्रा में स्थित है

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6. पौराणिक धारणा के अनुसार एक बार भयंकर बाढ़ में कालीमठ मंदिर बह गया था। लेकिन धारी देवी की प्रतिमा एक चट्टान से सटी होने के कारण धारो गांव में बह कर आ गई थी। गांववालों को धारी देवी की ईश्वरीय आवाज सुनाई दी थी कि उनकी प्रतिमा को वहीं स्थापित किया जाए। जिसके बाद गांव वालों ने माता के मंदिर की स्थापना वहीं कर दी। पुजारियों के अनुसार मंदिर में माँ काली की प्रतिमा द्वापर युग से ही स्थापित है। कालीमठ एवं कालीस्य मठों में माँ काली की प्रतिमा क्रोध मुद्रा में है, परन्तु धारी देवी मंदिर में काली की प्रतिमा शांत मुद्रा में स्थित है।

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