पहाड़ के हवलदार चाचा को जनरल बिपिन रावत का सलाम, वीरान होने से बचा लिया एक गाँव (General Bipin Rawat Salutes Uncle Hawaldar Bharat Singh)
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Image: General Bipin Rawat Salutes Uncle Hawaldar Bharat Singh

पहाड़ के हवलदार चाचा को जनरल बिपिन रावत का सलाम, वीरान होने से बचा लिया एक गाँव

पहाड़ के हवलदार चाचा को जनरल बिपिन रावत का सलाम, वीरान होने से बचा लिया एक गाँव

जनरल विपिन रावत को कौन नहीं जानता। उत्तराखंड के पौड़ी जिले के द्वारीखाल विकासखंड की ग्राम पंचायत बिरमोली का तोकग्राम है सैंणा, जहां का पहाड़ी लाल आज देश के सेना प्रमुख की कमान संभाल रहा है। दिसम्बर 2016 से भारतीय थल सेना की कमान संभाले हुए जनरल बिपिन रावत का बचपन सैणा गाँव में ही बीता था। विडम्बना है कि आज भी जनरल के गाँव तक रोड नहीं है और मुख्य सड़क से तकरीबन 2 किलोमीटर चल कर ही सैणा गाँव तक पंहुचा जाता है। कुछ दिन पहले जब जनरल विपिन रावत अपने पैतृक गाँव पहुंचे तो जनरल ने जहां एक ओर प्रोटोकॉल के तहत साथ में आए सरकारी नुमाइंदों से गाँव तक सड़क को लेकर चर्चा की, वहीं दूसरी ओर अपने हवलदार चाचा भरत सिंह के हौसलों को भी सराहा। जिन्होंने तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सैणा गांव को वीरान नहीं होने दिया।

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भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए हवलदार भरत सिंह आज भी सेना से मिले सबक के दम पर उस गांव को आबाद किए हुए हैं, जिस गाँव से भारतीय थल सेना के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत की यादें जुड़ी हुई हैं। पिछले दिनों पैतृक गांव सैंणा पहुंचे जनरल रावत ने अपने चाचा हवलदार भरत सिंह को इस बात के लिए सैल्यूट किया कि उनकी बदौलत जनरल का यह गांव उत्तराखंड के उन 1668 गांवों की फेहरिस्त में शामिल नहीं हुआ जो आज 'घोस्ट' विलेज घोषित हो चुके हैं। कोटद्वार से करीब 50 किमी दूर है द्वारीखाल ब्लॉक की ग्राम पंचायत बिरमोली में मुख्य सड़क से करीब डेढ़ से दो किलोमीटर दूर खड़ंजे वाले कच्चे रास्ते से जुड़ा हुआ है भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत का गांव सैंणा।

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कारगिल शहीद सुरमान सिंह बिष्ट की ग्रामसभा बिरमोली के 13 परिवारों वाले तोक ग्राम सैंणा में बीते करीब एक दशक से जनरल रावत के चाचा भरत सिंह पत्नी सुशीला देवी समेत रह रहे हैं। बाकी परिवारों ने धीरे-धीरे गांव छोड़ दिया। रि० हवलदार भरत सिंह ने अपने ही दम पर गांव को आबाद रखा हुआ है। भारत सिंह पत्नी सुशीला देवी के साथ मौसमी सब्जियां उगाने के साथ ही आम, लीची, बेडू, तिमला, चीकू, अनार, नाशपाती व सेब के फलदार पेड़ भी उगाते हैं। भरत सिंह बताते हैं कि अन्य गांवों की तरह ही इस गांव में भी जंगली जानवरों का आतंक है, परन्तु गुलदार उनके मित्र की तरह है, जो उनके घर के आसपास ही रहता है और उसी के कारण अन्य जंगली जानवर घर के आसपास नहीं फटकते। विपरीत परिस्थितियों में हौसलों को बुलंद रखने का जज्बा सिखाती है भारतीय सेना। इसी भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए हवलदार भरत सिंह को जनरल के साथ ही हमारा भी सैल्यूट।

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