पहाड़ के जांबाज कैप्टन रक्षित भैसोड़ा की मौत, इकलौते बेटे के जाने से परिवार में मातम (Caption rakshit bhaisora died in an accident )
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पहाड़ के जांबाज कैप्टन रक्षित भैसोड़ा की मौत, इकलौते बेटे के जाने से परिवार में मातम

पहाड़ के जांबाज कैप्टन रक्षित भैसोड़ा की मौत, इकलौते बेटे के जाने से परिवार में मातम

ये कैसी क्रूर किस्मत है, जो किसी की आंखों में आंसू ले आती है, तो किसी को जिंदगी भर का नासूर दे देती है। एक बार फिर से उत्तराखंड का एक सपूत काल के गाल में समा गया। इकलौते बेटे के मौत की खबर जब घरवालों को पहुंची तो कोहराम मच गया। कैप्टन रक्षित भैसोड़ा जिनकी उम्र सिर्फ 23 साल थी। मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के ग्राम भैसाड़ी, बिनखोला, ध्याड़ी से ताल्लुक रखते हैं कैप्टेन रक्षित भैसोड़ा। उनके पिता नंदन सिंह भैसोड़ा राजकीय इंटर कॉलेज में शिक्षक हैं। दुख इस बात का है कि रक्षित अपने परिवार के इकलौते बेटे थे। नंदन सिंह फिलहाल अपनी पत्नी और छोटी बेटी के साथ किराये के मकान में रह रहे हैं। 2012 में रक्षित भैसोड़ा का सलेक्शन एनडीए में हुआ और फिलहाल वो 21 जाट रेजीमेंट में कैप्टन के पद पर तैनात थे।

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बुधवार रात जम्मू में कैप्टन रक्षित अपने एक दोस्त के साथ कार से सफर कर रहे थे। बताया जा रहा है कि करीब पौने एक बजे कार अनियंत्रित हो गई। हादसे में रक्षित की मौत हो गई। गुरुवार सुबह करीब साढ़े तीन बजे सैन्य अधिकारियों ने ये जानकारी कैप्टन रक्षित के परिजनों को दी। इकलौते बेटे के जाने का गम क्या होता है ये उस परिवार से पूछिए, जिसके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे, उस मां से पूछिए जिसकी भूख-प्यास मर गई है, उस बहन से पूछिए, जिससे वापस आने का वादा कर रक्षित ड्यूटी पर चले गए और वापस ही नहीं लौटे। रक्षित बचपन से ही मेधावी थे। 5 वीं कक्षा के बाद उनका सलेक्शन सैनिक स्कूल घोड़ाखाल में हो गया। 2012 में रक्षित ने एनडीए की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद देहरादून के आइएमए में रक्षित ने सैन्य अफसर की ट्रेनिंग की।

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2016 में पासिंग परेड के बाद रक्षित ने 21 जाट रेजीमेंट में लेफ्टिनेंट के पर ज्वॉइन किया था। कैप्टन रक्षित भैसोड़ा का परिवार कई साल तक नैनीताल के स्टेलने कंपाउंड में किराये पर रहा। पिता नंदन सिंह ने भैसाड़ा ने हल्द्वानी के पास जय दुर्गा कॉलोनी में जमीन खरीदी। जमीन पर मकाने बनाने का काम चल रहा था। सोचा था कि बेटा अब कामयाब हुआ है तो अपने जीवन की जमा पूंजी मकान पर लगाई जाए। परिवार जमीन के पास ही किराये का मकान लेकर रह रहा था। अब एक ऐसी खबर आई कि हर कोई सन्न रह गया। जवान बेटे की अर्थी जब घर आई तो मां फूट-फूटकर रोने लगी। बहन की आखों में अब पानी ही नहीं, पिता को समझ नहीं आ रहा है कि आखिर ये क्या हो गया। कैप्टन रक्षित भैसोड़ा को नमन, भगवान परिवार को हर दुख सहने की क्षमता दे।

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