कुमाऊं रेजीमेंट का वो अमर शहीद, जो मरने तक अपने पैर से मशीन-गन चलाता रहा (Story of major shaitan singh )
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कुमाऊं रेजीमेंट का वो अमर शहीद, जो मरने तक अपने पैर से मशीन-गन चलाता रहा

कुमाऊं रेजीमेंट का वो अमर शहीद, जो मरने तक अपने पैर से मशीन-गन चलाता रहा

आप कभी उत्तराखंड के रानीखेत जाइए..वहां कुमाऊं रेजिमेंट का म्यूजियम देखिए। यकीन मानिए आपके रौंगटे खड़े हो जाएंगे। कुमाऊं रेजीमेंट के वीर सपूत मेजर शैतान सिंह ने किस तरह अपने 114 जवानों के साथ 02 हजार से ज्यादा चीनी सैनिकों से लड़े। भारत की स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने उस दौरान गीत गाया था ‘’ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी’। इसी गीत में एक लाइन है ‘थी खून से लथपथ काया, फिर भी बंदूक उठाई, एक-एक ने दस को मारा, फिर अपनी जांन गंवा दी’। मेजर शैतान सिंह ही वो शख्स थे, जिनकी वीरता से प्रभावित होकर पंक्तियां लिखी गईं थी। मेजर शैतान सिंह का जन्म 1 दिसम्बर 1924 को राजस्थान के जोधपुर में हुआ था। इनका पूरा नाम था शैतान सिंह भाटी था। पिता हेमसिंह भाटी सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल थे।

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पिता को देखकर ही मेजर शैतान सिंह ने देशभक्ति सीखी और कुमाऊं रेजीमेंट में बतौर अधिकारी शामिल हुए। 1962 का चीन भारत युद्ध भारत के लिये बिलकुल अनपेक्षित था। चुशुल सेक्टर जो कि लद्दाख क्षेत्र में पडता था सामरिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण था। इसलिये भारत इससे पीछे नहीं हट सकता था। भारत ने यहां एक चौकी बनाई थी। 13 वीं कुमांउ बटालियन के 120 सैनिक यहां मौजूद थे। अंधेरे में चीन के 5000 सैनिकों ने इस पोस्ट पर जोरदार हमला किया। चीनी सेना के हाथों में अत्याधुनिक हथियार थे। मात्र 120 जवानों के साथ मेजर शैतान सिंह 5000 की चीनी सेना से लोहा ले रहे थे। 2 हजार चीनी सैनिकों को मारकर भारत के 120 जवानों में से 114 जवान शहीद हुए। मेजर शैतान सिंह अंतिम दम तक लड़े और जब गोलियों से छलनी हो गए।

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तब उनके दो साथी जवानों ने कहा सर आपको मेडकल यूनिट तक भेज देते हैं। मेजर शैतान सिंह ने कहा- मुझे और मेरी मशीनगन को यहीं छोड़ दो। हाथ कट चुके थे, पेट औऱ जांघ में गोली लगी थी, मेजर ने पैर से मशीनगन का ट्रिगर दबाया और दुश्मन का अंतिम साँस तक सामना किया, लड़ते-लड़ते प्राण न्योछावर कर दिए लेकिन उस पोस्ट पर दिन भर चीनी सेना को इंच भर आगे नहीं बढ़ने दिया। आपको जानकर हैरानी होगी कि तीन दिन बाद जब मेजर शैतान सिंह का पार्थिव शरीर मिला, तो वो लड़ने की पोजीशन में ही थे। इस अदम्य साहस और वीरता के लिए मेजर शैतान सिंह को परमवीर चक्र मिला। कुमाऊं रेजीमेंट के इस वीर अधिकारी और देश के परमवीर को राज्य समीक्षा का सलाम। ऐसे वीर दुनिया में कभी-कभार ही पैदा होते हैं।

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