Connect with us
Image: Mata sati anasuya ashram ancient story

जब देवभूमि में नारी शक्ति के आगे हारे स्वर्ग के देवता, भूल हुई तो माफी भी मांगी थी!

जब देवभूमि में नारी शक्ति के आगे हारे स्वर्ग के देवता, भूल हुई तो माफी भी मांगी थी!

शास्त्रों में लिखा गया है कि मनुष्य अपने कर्मों से ही भगवान बनता है। जहां तक उत्तराखंड की बात है तो यहां आदि-अनादि काल से ही स्त्रियों को देवी का दर्जा दिया गया है। दरअसल इस धरती में ऐसी नारियां हुई हैं, जिन्होंने अपने कर्मों से शास्त्रों में जगह बनाई और इतिहास के पन्नों में दर्ज हुई। क्या आप यकीन करेंगे कि देवभूमि मे ही एक महिला, एक मातृ शक्ति, एक सती के आगे त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु, महेश भी हार गए थे। लोककथाओं के मुताबिक विवाद सिर्फ इस बात का था कि त्रिदेव उस नारी शक्ति के सतीत्व की परीक्षा लेना चाहते थे। चमोली ज़िले में मंडल से क़रीब छ: किलोमीटर की ऊँचाई पर पहाड़ों में एक आश्रम स्थित था। इस आश्रम का नाम है अनुसूया आश्रम। यहां महर्षि अत्रि अपनी धर्मपत्नी अनूसुया देवी के साथ रहते थे। महर्षि अत्रि की तरह ही देवी अनुसूया भी शास्त्रों में पारंगत और योग विद्या की महारथी थीं।

यह भी पढें - भगवान बदरीनाथ भविष्य में इस जगह पर विराजमान होंगे
इसी आश्रम में त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने अनुसूया माता के सतीत्व की परीक्षा ली थी। दरअसल महर्षि नारद ने त्रिदेवियों यानी माता पार्वती, सरस्वती और लक्ष्मी से कहा था कि तीनों लोकों में अनसूया माता से बढ़कर कोई सती नहीं है। महर्षि नारद की बातें सुनकर त्रिदेवियों ने त्रिदेवों को अनसूया माता की परीक्षा लेने के लिए भेज दिया। कहा जाता है कि धरती पर जब तीनों देवता माता अनसूया के आश्रम में साधु के वेश में आए, तो उनसे नग्नावस्था में भोजन करवाने के लिए कहा। साधुओं को खाली पेट वापस भेजा नहीं जा सकता था। तब मां अनसूया ने अपने पति अत्रि ऋषि के कमंडल से तीनों देवताओं पर जल छिड़का। कहा जाता है कि इसके बाद तीनों देवता बाल रूप में चले गए। बाल रूप में जाने की वजह से तीनों देवता अपने स्थानों पर वापस नहीं पहुंचे।

यह भी पढें - उत्तराखंड के इस सिद्धपीठ में रात को नृत्य करती हैं परियां
तीनों देवियां परेशान होकर इस आश्रम में जा पहुंची। वहां तीनों ने माता अनसूया से क्षमा याचना कर तीनों देवों को उनके मूल स्वरूप में प्रकट करवाने के लिए कहा। सती अनसूया ने तीनों बच्चों पर जल छिड़ककर उन्हें उनका पूर्व रूप प्रदान किया। कहा जाता है कि उस वक्त स्वर्ग के देवताओं को भी अपनी भूल का आभास हो गया था। सभी ने माता से क्षमा मांगी। इसके बाद ब्रह्मा ने चंद्रमा, शिव ने दुर्वासा और विष्णु ने दत्तात्रेय के रूप में माता अनसूया की गोद से जन्म लिया। इस वजह से माता अनुसूया को 'पुत्रदा' कहा जाता है। ये देवभूमि में नारी शक्ति की ताकत का वो दृश्य था, जिसके आगे त्रिदेवों को हार माननी पड़ी थी। उत्तराखंड के चमोली जिले में मंडल से करीब 6 किलोमीटर ऊपर ऊंचे पहाड़ों पर मौजूद है माता अनुसूया का मंदिर। यहां आकर आपको भी अहसास होगा कि नारियों की पूजा का विधान उत्तराखंड में सदियों पुरानी परंपरा है।

Loading...

Latest Uttarakhand News Articles

वीडियो : आछरी - गढ़वाली गीत
वीडियो : बाघ-तेंदुओं से अकेले ही भिड़ जाता है पहाड़ का भोटिया कुत्ता
वीडियो : IPS अधिकारी के रिटायर्मेंट कार्यक्रम में कांस्टेबल को देवता आ गया

उत्तराखंड की ट्रेंडिंग खबरें

वायरल वीडियो

इमेज गैलरी

Trending

SEARCH

To Top