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Image: Dodital birth place of lord ganesha

Video..तो उत्तराखंड मूल के हैं भगवान गणेश! यहीं है गणपति की जन्मभूमि

Video..तो उत्तराखंड मूल के हैं भगवान गणेश! यहीं है गणपति की जन्मभूमि

क्या आप कभी उत्तरकाशी क्षेत्र के कैलसू (कैलासू) क्षेत्र गए हैं ? यहां सदियों से एक गीत गाया जाता है और लोग ये मंगल गीत लगाकर पारंपरिक नृत्य करते हैं। इस गीत के बोल हैं ‘गणेश जन्‍मभूमि डोडीताल कैलासू, असी गंगा उद्गम अरू माता अन्‍नपूर्णा निवासू।।’ यहां गणेश भगवान को सदियों से स्‍थानीय बोली में डोडी राजा कहा जाता है। स्कंद पुराण के केदारखंड से पता चलता है कि गणेश जी का प्रचलित नाम डुंडीसर भी है, जिसे डोडीताल से ही लिया गया है। ये दिव्य स्थान उत्तरकाशी जिले में संगम चिट्टी से लगभग 23 किलोमीटर दूर स्थित है। मान्यता है कि जब मां पार्वती यहां पर स्नान करने के लिए गयी थीं तो उन्होंने अपने उबटन से एक बालक की प्रतिमा का निर्माण कर उसमें प्राण डाल दिये, यहीं पर भगवान गणेश की उत्पत्ति हुई। इसी का वर्णन स्कन्द पुराण के केदार खंड में किया गया है।

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ज़ाहिर सी बात है कि जब पिता शिव का देवभूमि से ही नाता है तो, पुत्र का क्यों नहीं ? अगर शिव सत्य हैं, तो मां पार्वती भी सत्य हैं। सिर्फ डोडीताल ही नहीं भगवान शिव के संपूर्ण परिवार का संबंध ही उत्तराखंड से है। त्रियुगीनारायण मंदिर में भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ। मां पार्वती यानी मां नंदा का मायका उत्तराखंड में कहा जाता है और इसलिए हर 12 साल बाद नंदा देवी राजजात यात्रा होती है और इस दौरान मां पार्वती अपने मायके आती हैं। शिव और पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का सीधा संबंध कार्तिक स्वामी मंदिर से है, तो भगवान गणेश का सीधा संबंध डोडीताल से है। यहां तक कि गणेश जी सिर कटने की कहानी का सीधा संबंध पाताल भुवनेश्वर गुफा से है और ये भी उत्तराखंड में ही है। कहते हैं भगवान गणेश का जन्म डोडीताल मे हुआ था। डोडीताल में मां अन्नपूर्णा का सदियों पुराना मंदिर है। मान्यता है कि विघ्नविनाशक भगवान गणेश डोडीताल के अन्नपूर्णा मंदिर मे मां के साथ आज भी निवास करते हैं।

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चारों धामों की तरह ही मां अन्नपूर्णा मंदिर के कपाट खुलने भी विधि-विधान से खुलते हैं। खास बात ये है कि डोडीताल में मां अन्नपूर्णा के कपाट गंगोत्री और यमुनोत्री धाम से पहले खुलते हैं। जानकार कहते हैं कि डोडीताल क्षेत्र मध्‍य कैलाश में आता था और ये ही स्थल मां पार्वती का स्‍नान स्‍थल था। स्‍वामी चिद्मयानंद के गुरु रहे स्‍वामी तपोवन ने अपनी किताब हिमगिरी विहार में भी डोडीताल को गणेश का जन्‍मस्‍थल कहा है। मुद्गल ऋषि के द्वारा लिखे गए मुद्गल पुराण में भी इस बात का जिक्र किया गया है। अब जरा स्थानीय लोगों द्वारा भगवान गणेश की पूजा का विधान भी देखिए।

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