उत्तराखंड: मासूम आयुष की लाश पड़ी रही..3 दिन पिता करता रहा इंतजार..रिपोर्ट नहीं आई (Kashipur ayush death case)
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Image: Kashipur ayush death case

उत्तराखंड: मासूम आयुष की लाश पड़ी रही..3 दिन पिता करता रहा इंतजार..रिपोर्ट नहीं आई

पिता अपने जिगर के टुकड़े के शव को पोस्टमार्टम हाउस में 3 दिनों तक बेबसी से देखता रहा मगर बच्चे की कोरोना रिपोर्ट्स नहीं आईं। सिस्टम आखिर किस ओर अग्रसर है?

अभी हाल ही में राज्य समीक्षा पर आपने खबर पढ़ी होगी जिसमें रुद्रपुर की एक लड़की का शव 3 दिनों तक मोर्चरी में सड़ता रहा और उसके परिजन उसकी कोरोना रिपोर्ट्स का इंतजार करते रहे। ऐसा ही कुछ काशीपुर से भी सामने आया है। ऐसी घटना जो आपके दिल को भी झंझोड़ कर रख देगी। सरकार आश्वासन तो दे देती है कि राज्य इस बीमारी से लड़ने के लिए पूरी तरह सक्षम है मगर असलियत में जो हो रहा है वो लोगों के सामने नहीं आ रहा। इन वायदों और बड़ी-बड़ी बातों के पीछे एक कड़वा सच छिपा है। एक शर्मसार करने वाली घटना उत्तराखंड के काशीपुर से सामने आई है। इसमें सिस्टम की लापरवाही साफ दिखती है। एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक काशीपुर में महज डेढ़ वर्ष के बच्चे की बुखार और उल्टी से बीते शनिवार की मौत हो गई। तीन दिनों तक डेढ़ साल के बच्चे का शव पोस्टमार्टम हाउस में केवल इसलिए पड़ा रहा क्योंकि उसकी कोरोना रिपोर्ट्स नहीं आई थी। अपने डेढ़ वर्षीय पुत्र की लाश देख पिता के आंसू थम नहीं रहे थे। सवाल यह उठता है कि जब सरकार ने कहा है कि कोरोना रिपोर्ट्स 1 दिन के अंदर-अंदर आ जाती हैं तो 3 दिन का समय क्यों लग रहा है? ऐसे में इस लापरवाही की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? सभी उम्मीदें हार जाने के बाद मृत बच्चे के पिता आखिरकार ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंघल को बच्चे का शव दिलाने की गुहार लगाई जिसके बाद परिजनों को बच्चे का शव सौंपा गया। आगे पढ़िए

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प्राप्त जानकारी के अनुसार काशीपुर के लाहौरियान निवासी डेढ़ वर्षीय बच्चे आयुष सक्सेना की 27 मई यानी कि बीते बुधवार को बुखार व उल्टी एवं दस्त से मौत हो गई। उसके पिता हरिओम सक्सेना ने बच्चे के मौत की खबर एहतियात के तौर पर प्रशासन को दी लेकिन उसको क्या पता था कि सिस्टम की संवेदनहीनता उसके दुखों को और बढ़ा देगी। 28 मई को बच्चे का शव काशीपुर के पोस्टमार्टम हाउस में रख दिया गया था और मृत बालक का सैंपल कोरोना टेस्ट के लिए भेज दिया गया। मगर तीन दिनों के लंबे समय तक बच्चे की कोरोना रिपोर्ट्स नहीं आईं। एक ओर बेबस पिता जो रिपोर्ट का इंतजार कर रहा था। बार-बार स्टाफ से बस यही पूछ रहा था कि सैंपल कब आएंगे। बच्चे का शव गर्मी से सड़ने से बचाने के लिए भी बर्फ की सिल्ली का इंतजाम भी हर 4-5 घंटे में उस के पिता को ही करना पड़ रहा था। वहीं दूसरी ओर बच्चे की मां के आंसू भी नहीं थम रहे थे। वह 3 दिनों तक अपने लाडले के शव का इंतजार कर रही थी। जब 3 दिनों तक बच्चे के कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट नहीं आईं और धैर्य जवाब दे गया तो थक हार कर मृत बच्चे के पिता ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंघल से गुहार लगाई। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंघल ने तुरंत पिता की मजबूरी को समझते हुए इसपर एक्शन लिया और सीएमएस एवं कोतवाल से बात करने पर शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया।

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