गढ़वाल में 23 साल की स्वाति ध्यानी को सिस्टम ने मार डाला, हत्या का केस दर्ज हो (Gunanand jakhmola blog on pauri garhwal swati dhyani)
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Image: Gunanand jakhmola blog on pauri garhwal swati dhyani

गढ़वाल में 23 साल की स्वाति ध्यानी को सिस्टम ने मार डाला, हत्या का केस दर्ज हो

पौड़ी गढ़वाल से शुरू हुआ ई-जनांदोलन, स्वाति को इंसाफ दिलाएं। आप भी एक धिक्कार पत्र सीएम, सांसद और क्षेत्रीय विधायक को लिखें..पढ़िए गुणानंद जखमोला का ब्लॉग

पौड़ी गढ़वाल रिखणीखाल के प्राथमिक हेल्थ सेंटर में 23 साल की स्वाति ध्यानी ने एक मृत बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद से ही स्वाति की हालत नहीं सुधरी और उसे जब तक कोटद्वार अस्पताल ले जाया गया तो उसे बचाया नहीं जा सका। डाक्टरों का कहना था कि अत्याधिक रक्तस्राव होने से स्वाति की मौत हुई। स्वाति के परिजनों का कहना है कि पीएचसी रिखणीखाल में उसे न तो अच्छा इलाज मिला और न समय पर रेफर किया गया। स्वाति की मौत अकेली और पहली मौत नहीं है। पर्वतीय जिलों में लचर स्वास्थ्य सुविधाओं और रक्त की कमी के कारण हर साल स्वाति जैसी दर्जनों गर्भवती महिलाएं या प्रसूताएं असमय ही मौत का शिकार हो जाती हैं। अपने पहले बच्चे को देखने की हसरत में स्वाति ने बच्चा तो गंवाया ही साथ ही अपना जीवन भी गंवा दिया।

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अब सवाल यह है कि स्वाति ध्यानी की मौत का जिम्मेदार कौन? सीधा सा जवाब है कि लचर स्वास्थ्य सेवाएं। इसके लिए जिम्मेदार कौन? सिस्टम। सिस्टम के लिए उत्तरदायी कौन? जनप्रतिनिधि। यानी जनप्रतिनिधियों ने कभी स्वाति जैसी महिलाओं के जीवन का महत्व ही नहीं समझा। स्वाति के वोट की बदौलत सत्ता का सुख भोगने वाले विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री को उसकी मौत से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि जनप्रतिनिधियों की नजर में उसकी कीमत महज एक वोट थी और उस वोट की गणना हो या न हो, क्या फर्क पड़ता है। जब चुनाव आएगा तो देखा जाएगा। जनप्रतिनिधियों को इसकी परवाह नहीं है और हम इस लचर व्यवस्था के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं मानते, जबकि इन प्रतिनिधियों को तो जवाबदेह होना चाहिए।

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दूसरा सवाल यह है कि आखिर हम लोग कब तक स्वाति जैसी मासूमों की मौत पर चुप्पी साधे रहेंगे? आखिर हम व्यवस्था से सवाल क्यों नहीं करते? कल स्वाति की बारी थी, आज किसी और की होगी और हो सकता है कि आप या हमारे किसी परिजन के साथ भी ऐसे हो? दरअसल, यदि देखे तों स्वाति की मौत असमय नहीं एक सुनियोजित थी। व्यवस्था ने उसकी हत्या कर डाली। इसके लिए रिखणीखाल के जनप्रतिनिधि जिम्मेदार हैं। प्रदेश का मुखिया जिम्मेदार है। अगर आप इस असमय मौत के खिलाफ हैं तो कम से कम एक एक पत्र, मुख्यमंत्री जो कि स्वयं स्वास्थय मंत्री भी हैं, एक प्रधान मंत्री, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग को भी भेजिए और इस दुर्घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग कीजिये। एक धिक्कार पत्र क्षेत्रीय विधायक को भी लिखिए, क्योंकि वो 10 साल से विधायक हैं, ये क्षेत्र लैंसडाउन के बिल्कुल पास है, फिर भी स्वास्थ्य सुविधाओं का इतना अकाल क्यों है। जागिए और इस मुहिम का हिस्सा बनिए ताकि कोई और स्वाति यूं ही दम न तोड़ें। आप इस मुहिम में मुझसे 9410960088 या प्रेम बहुखंडी से 9810881284 से संपर्क कर सकते हैं
वरिष्ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला के फेसबुक वॉल से साभार

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