उत्तराखंड नैनीतालHigh Court allows animal killing in public interest

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने "जनहित" में दी पशुबलि की इजाजत, इस "काले-फैसले" का विरोध होना चाहिए

नंदा देवी के लिए बलि पर हाईकोर्ट का ये फैसला निश्चित रूप से अजीब है। हाईकोर्ट में नंदा देवी महोत्सव के लिए पशु बलि को लेकर दाखिल याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने ....

High Court allows animal killing: High Court allows animal killing in public interest
Image: High Court allows animal killing in public interest (Source: Social Media)

नैनीताल: किसी निरीह की देवी-देवताओं के नाम पर जान लेना "जनहित" कैसे हो सकता है? किसी पशु को मारने में देवी कैसे खुश हो सकती है ? कुछ नासमझों ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में पशु बलि परंपरा को लेकर याचिका दाखिल की, और हाईकोर्ट ने इसे "जनहित याचिका" मानते हुए कुछ नियमों के अंतर्गत पशु बलि की अनुमति दे दी। आज का दिन उत्तराखंड के इतिहास में निश्चित रूप से काले अक्षरों में अंकित हो गया है।

High Court allows animal killing in "public interest"

कई लोगों को लगता है कि उनके देवी और देवता निरीह और असहाय पशुओं की बलि लेकर खुश होंगे, हालांकि इसका इंसानियत से कोई वास्ता नहीं है। ये लोग बस अपने स्वार्थ के लिए भगवान को भी अपने घृणित कार्यों के बीच में घसीट लाते हैं। आज उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जो फैसला सुनाया है वह काले-फैसले के रूप में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने नंदा देवी महोत्सव के लिए निरीह और बेगुनाह पशुओं को मारने की अनुमति दे दी है, इसके लिए एक स्लॉटर हाउस चिन्हित कर दिया है, और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र दिलवाने के निर्देश दिए हैं।

किसी की जान लेना धार्मिक आस्था ???

नैनीताल जिले के कुछ स्थानीय लोगों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की, उन्होंने कहा कि उनके पूर्वजों के समय से नंदा देवी महोत्सव में पशु बलि दी जाती थी लेकिन 2015 में मंदिर परिसर में बकरों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई, जिसके कारण बलि प्रथा भी समाप्त हो गई। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इस रोक से श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था (??) को ठेस पहुंच रही है। इसलिए, परंपरा को बनाए रखते हुए महोत्सव के दौरान बकरों की बलि के लिए स्लॉटर हाउस की अनुमति दी जानी चाहिए।

हाई कोर्ट का काला-फैसला

आज 29 अगस्त 2025, शुक्रवार को सुनवाई के दौरान नैनीताल हाईकोर्ट ने कहा कि श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए नंदा देवी महोत्सव के लिए बकरे की बलि नगर पालिका द्वारा निर्धारित स्लॉटर हाउस में की जाएगी। इसके लिए अदालत ने नगर पालिका को उपयुक्त स्थान चिन्हित कर स्लॉटर हाउस उपलब्ध कराने और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) दिलवाने के निर्देश दिए। साथ ही, हाईकोर्ट ने फूड इंस्पेक्टर को बलि की प्रक्रिया के दौरान जांच और सभी नियमों का पालन सुनिश्चित करने का आदेश भी जारी किया।

चिह्नित हुआ स्लॉटर हाउस

नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा ने अदालत को बताया कि नैनीताल के तल्लीताल हरिनगर क्षेत्र में पहले से एक स्लॉटर हाउस मौजूद है। हालांकि, 2022 तक इसमें कई समस्याएं थीं - रक्त प्रवाह की उचित व्यवस्था नहीं थी, बिजली की उपलब्धता नहीं थी और अपशिष्ट निस्तारण की प्रणाली भी अधूरी थी। अब इन सभी समस्याओं को हल कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में महोत्सव के दौरान होने वाली पशु बलि इसी स्लॉटर हाउस में नियमों के अनुसार की जाएगी।

आस्था की आड़ में जान लेना सबसे बड़ी कुप्रथा

अगर हम पुरानी परंपराओं की बात करें, तो भारतवर्ष में कई आक्रान्ताओं के आने के बाद सती प्रथा जैसी कई समाज के लिए खतरनाक कुप्रथाएं भी भारतवर्ष के सामाजिक जीवन में शामिल हो गईं, तो क्या कल को किसी की "जनहित" याचिका पर सुप्रीम कोर्ट फिर से सती प्रथा शुरू करने की इजाजत दे देगा ? क्या ये सवाल नहीं होना चाहिए ? निश्चित रूप से उत्तराखंड हाईकोर्ट को इस फैसले पर दोबारा विचार करने की आवश्यकता है। राज्य समीक्षा की उत्तराखंड हाईकोर्ट से विनती है कि देवी देवताओं ने नाम से कु-प्रचलित इन प्रथाओं को रोकने की दिशा में कार्य किया जाए, नासमझों को कुछ अच्छा ज्ञान देने की कोशिश की जाए तो उत्तराखंड हाईकोर्ट का ही मान-सम्मान और विश्वास बढ़ेगा। आस्था की आड़ में किसी बेगुनाह की जान लेना कई कुप्रथाओं को फिर शुरू कर सकता है।