उत्तराखंड चमोलीBodies of mother and sons recovered in Nanda Nagar disaster

नंदानगर आपदा: कई टन मलबे के नीचे मार्मिक दृश्य, मां ने दोनों हाथों में थामे हुए थे जुड़वा बेटे

हजारों टन मलबे के नीचे दबी कांता देवी के दोनों हाथों में उनके जुड़वा बेटे विकास और विशाल थे। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि मां ने आखिरी सांस तक अपने बच्चों को बचाने की जी-जान से कोशिश की होगी। तीनों शवों को देख गांव की महिलाएं बिलख कर रोने लगी।

Nanda Nagar disaster: Bodies of mother and sons recovered in Nanda Nagar disaster
Image: Bodies of mother and sons recovered in Nanda Nagar disaster (Source: Social Media)

चमोली: चमोली जिले के नंदानगर आपदा के बीच शुक्रवार को एक बेहद मार्मिक दृश्य सामने आया। यहां रेस्क्यू टीम ने 32 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मलबे में दबी कुंती देवी और उनके जुड़वा बच्चों के शव बरामद किए। मृतक कुंती देवी ने दोनों हाथों में अपने जुड़वा बेटों को पकड़ा हुआ था, इस दृश्य को देखकर सब भावुक हो गए।

Bodies of mother and sons recovered in Nanda Nagar disaster

चमोली जिले के नंदानगर क्षेत्र के आपदाग्रस्त कुंतरी लगा फाली गांव में बादल फटने के कारण नदियों और नालों में अचानक आए उफान और भूस्खलन के कारण कई मकान गिर गए और दर्जनभर से अधिक घर मलबे में दब गए। इस आपदा में की चपेट में ग्रामीण कुंवर सिंह का घर भी आ गया था, जिस कारण कुंवर सिंह उनकी पत्नी कांता देवी और उनके दो जुड़वा बेटे विकास और विशाल (10 वर्ष) में दब गए। रेस्क्यू टीम ने आपदा के 16 घंटे की अथक मशक्कत के बाद मलबे में दबे कुंवर सिंह, पुत्र बलवंत सिंह को जीवित बाहर निकाला, लेकिन उनकी पत्नी और जुड़वा बेटे नहीं बच सके।

कांता देवी की दोनों बाहों में थे जुड़वा बेटे

गुरुवार तड़के भारी बारिश के बाद आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने गांव को तबाह कर दिया था। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार 32 घंटे तक राहत और बचाव कार्य करती रहीं। बचावकर्मियों ने कटर मशीनों से आरसीसी की छतें काटकर मलबे में रास्ता बनाया। शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे कांता देवी और उनके दोनों बेटों के शव बरामद किए गए। जब बचावकर्मियों ने शवों को बाहर निकाला तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। हजारों टन मलबे के नीचे दबे कुंवर सिंह के मकान में जब बचावकर्मी पहुंचे तो उन्होंने पाया कि कांता देवी (38) एक भारी वस्तु के नीचे दबी हुई थीं। उनके दोनों हाथों में उनके जुड़वा बेटे विकास और विशाल थे। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि मां ने आखिरी सांस तक अपने बच्चों को बचाने की जी-जान से कोशिश की होगी। तीनों माँ-बेटों के शवों को देख गांव की महिलाएं बिलख कर रोने लगी।

आखों के सामने चली गई पत्नी

बीते शुक्रवार को कुंतरी लगा फाली गांव से इन तीनों माँ-बेटे सहित कुल पांच शव बरामद हुए। सेना से सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर दिलबर सिंह रावत ने बताया कि हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि हमारा गांव ऐसी त्रासदी झेलेगा। चुफलागाड़ नदी गांव के नीचे बहती थी, इसलिए यहां सुरक्षित महसूस किया जाता था। लेकिन पहाड़ की चोटी से आए सैलाब ने सब कुछ तबाह कर दिया। उन्होंने बताया उनकी पत्नी भी इस हादसे में मलबे में दब गईं। वे बोले— “मेरी आंखों के सामने मेरी पत्नी मलबे में चली गई और मैं कुछ नहीं कर सका।” इस आपदा में गांव वालों के घर, मवेशी, खेती और लोग सभी का नुकसान हुआ है।