उत्तराखंड पिथौरागढ़Dharmendra of Pithoragarh became Sub Inspector

उत्तराखंड: सब इंस्पेक्टर बना भोजन माता का बेटा, खुशखबरी सुनकर छलक पड़े मां के आंसू

उत्तराखंड पुलिस ने सब इंस्पेक्टर बने धर्मेंद्र ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां और गुरु प्रताप सिंह दिया है। उन्होंने कहा कि “मेरी सफलता का सबसे बड़ा कारण मां का त्याग और उनके आशीर्वाद है।

Sub Inspector: Dharmendra of Pithoragarh became Sub Inspector
Image: Dharmendra of Pithoragarh became Sub Inspector (Source: Social Media)

पिथौरागढ़: उत्तराखंड के युवा अपनी कड़ी मेहनत के दम पर हर क्षेत्र में सफलता का परचम लहरा रहे हैं। इन्हीं में एक पिथौरागढ़ जिले के धर्मेंद्र भट्ट (ध्रुव) का उत्तराखंड पुलिस में सब इंस्पेक्टर पद पर चयन हुआ है। ध्रुव ने अपनी इस उपलब्धी से अपने परिजनों सहित पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है।

Dharmendra of Pithoragarh became Sub Inspector

पिथौरागढ़ जिले के छोटे से कस्बे मुवानी के मूल निवासी धर्मेंद्र भट्ट (ध्रुव) का चयन उत्तराखंड पुलिस सेवा में सब इंस्पेक्टर पद पर हुआ है। धर्मेंद्र भट्ट परिवार की सीमित आर्थिक स्थिति के बावजूद उन्होंने कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर अपने सपनों को साकार किया। पुलिस सेवा में चयन से पहले उन्होंने करीब पांच सालों तक प्राइवेट कंपनियों, होटलों और दुकानों में काम किया। कई बार निराशा हाथ लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार परीक्षा की तैयारी जारी रखी। आखिरकार उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और वे सब इंस्पेक्टर बन गए हैं।

मां के त्याग और आशीर्वाद से मिली सफलता

धर्मेंद्र भट्ट की मां पिछले 22 सालों से प्राथमिक विद्यालय मुवानी में मिड डे मील (भोजन माता) का कार्य कर रही हैं। जब उन्हें यह खबर मिली कि उनका बेटा SI बन गया है, तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। बेटे की सफलता ने उनके संघर्ष और त्याग को सार्थक कर दिया। धर्मेंद्र अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां और गुरु प्रताप सिंह पुंडीर को देते हैं। उनका कहना है “मेरी सफलता का सबसे बड़ा कारण मां का त्याग और उनके आशीर्वाद है। उन्होंने मुझे ईमानदारी, मेहनत और सेवा की भावना सिखाई।” धर्मेंद्र बताते हैं उत्तराखंड ग्रामीण बैंक की ऋषिकेश शाखा में कार्यरत गुरु प्रताप पुंडीर उनके के लिए प्रेरणा के स्रोत रहे हैं। यदि 'उन्हें अपने गुरु का स्नेह, शिक्षा और सही दिशा नहीं मिली होती, तो वे शायद वे इस मुकाम को हासिल नहीं कर पाते।

समाज की रक्षा और सेवा का माध्यम

धर्मेंद्र वर्तमान में डायट डीडीहाट से डी.एल.एड. की पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन अब उन्होंने यह पाठ्यक्रम छोड़कर पूरी निष्ठा से पुलिस सेवा को अपने करियर के रूप में चुना है। उनका मानना है कि “पुलिस सेवा सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि समाज की रक्षा और सेवा का माध्यम है।” इसीलिए वे आने वाले समय में पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे और समाज एवं देश की सेवा में खुद को समर्पित करेंगे। ध्रुव ने मुवानी में “ध्रुव कोचिंग क्लासेस” की स्थापना की। इस संस्थान से अब तक 25 से अधिक गरीब परिवारों के बच्चे विभिन्न सेवाओं — जैसे एसएससी जीडी, भारतीय सेना, और अन्य परीक्षाओं में चयनित होकर अपने सपनों को साकार कर चुके हैं। ध्रुव के लिए इन विद्यार्थियों की सफलता ही सबसे बड़ी प्रेरणा है।