उत्तराखंड चमोलीBear attacks couple in Chamoli

उत्तराखंड: पहाड़ में घास लेने गए दंपति पर भालू का भयानक हमला, पति की मौके पर मौत.. पत्नी गंभीर

चमोली जिले में जंगल में घास लेने गए एक दंपति पर भालू ने हमला किया। इस हमले में पति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई है।

Bear attacks couple: Bear attacks couple in Chamoli
Image: Bear attacks couple in Chamoli (Source: Social Media)

चमोली: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में जंगली जानवरों का आतंक खत्म होने का नाम ले रहा है। जहां आए दिन गुलदार के हमले की ख़बरें सामने आ रही थी अब भालू के बढ़ते हमलों ने लोगों की नींद उड़ा दी है। चमोली जिले में जंगल में घास लेने गए एक दंपति पर भालू ने हमला किया। इस हमले में पति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई है।

Bear attacks couple in Chamoli

जानकारी के अनुसार, बीते गुरूवार को चमोली जिले के गोपेश्वर क्षेत्र के ज्योर्तिमठ विकासखंड के अंतर्गत डुमक गांव के निवासी सुंदर सिंह और उनकी पत्नी लीला देवी पर भालू ने हमला किया। दरअसल वे दोनों रोज़ की तरह सुबह जंगल में मवेशियों के लिए घास लेने गए थे। उसी दौरान जंगल में झाड़ियों के पीछे छिपे एक भालू ने उन पर हमला कर दिया। भालू के हमले से दंपति बुरी तरह से घायल हो गए और उन्होंने मदद के लिए चीख-पुकार मचाई। उनकी आवाज़ सुनकर आसपास के लोग तुरंत जंगल की ओर भागे। ग्रामीणों का शोर सुनकर भालू वहाँ से भाग गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। ग्रामीणों के पहुंचने तक भालू के हमले में सुंदर सिंह की मौके पर ही मौत हो चुकी थी, जबकि उनकी पत्नी लीला देवी गंभीर रूप से घायल थीं।

ऋषिकेश एम्स में चल रहा लीला देवी का इलाज

स्थानीय लोगों ने तुरंत प्रशासन को सूचना दी और घायल महिला को पहले नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों ने लीला देवी को प्राथमिक उपचार दिया, उसके बाद उनकी की गंभीर स्थिति को देखते हुए एयर एंबुलेंस के जरिए ऋषिकेश एम्स रेफर किया गया है। ऋषिकेश एम्स में लीला देवी का इलाज चल रहा है। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल छा गया है।

सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी

ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों में भालुओं और गुलदारों के हमले से कई लोगों और मवेशियों की जान जा चुकी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि वन विभाग इस पर तुरंत संज्ञान ले और ऐसे जानवरों की आवाजाही वाले इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को बढ़ाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाएँ और भी बढ़ सकती हैं।