अल्मोड़ा: रानीखेत के एक इंटरकॉलेज में तैनात शिक्षक और एक महिला B.Ed प्रशिक्षु के बीच कथित अवैध प्रेम संबंध के आरोपों ने शिक्षा विभाग में हलचल मचा दी है। शिक्षा विभाग ने इस मामले की जांच रिपोर्ट और प्रस्तुत सबूतों के आधार पर सख्त कार्रवाई करते हुए दोनों को निलंबित कर दिया है।
Illicit relationship between teacher and B.Ed trainee
जानकारी के अनुसार, अल्मोड़ा जिले के राजकीय इंटर कॉलेज जैना में तैनात शिक्षक पवन कुमार का उनके विद्यालय में B.Ed प्रशिक्षु प्रशिक्षण के तौर पर आई महिला के साथ लंबे समय से अवैध संबंध चल रहा था। बीते सोमवार को शिक्षक की पत्नी, राजेंद्रि देवी हल्द्वानी से विद्यालय में पहुँचीं। उन्होंने विद्यालय परिसर में ही अपने पति और प्रशिक्षु शिक्षिका के बीच अवैध संबंध का आरोप लगाया। विद्यालय परिसर में दोनों पक्षों के बीच काफी हंगामा और हाथापाई भी हुई। विद्यालय में उपस्थित शिक्षक और विद्यार्थी इस घटना से हैरान रह गए।
विद्यालय परिसर में हुई संयुक्त बैठक
विद्यालय परिसर में हुई इस घटना की गंभीरता को देखते हुए बीते मंगलवार को विद्यालय प्रबंधन समिति, अभिभावक संघ और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक बुलाई गई। इस बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि दो दिनों के भीतर आरोपी शिक्षक का स्थानांतरण नहीं किया गया तो विद्यालय का बहिष्कार और आंदोलन किया जाएगा। इसके साथ ही महिला प्रशिक्षु को भी विद्यालय से तत्काल हटाने की मांग की गई।
आरोपी शिक्षक को किया गया निलंबित
शिक्षा विभाग ने अभिभावक समिति द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और व्हाट्सएप चैट के सबूतों के आधार पर निर्णायक कदम उठाया है। मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) अत्रेय सयाना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षक पवन कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही महिला B.Ed प्रशिक्षु को भी विद्यालय से हटा दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, पवन कुमार को कार्यमुक्त कर किसी अन्य स्थान पर अटैच किए जाने की तैयारी चल रही है।
अनुशासन का प्रतीक होते हैं शिक्षक
स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपी शिक्षक पर केवल निलंबन और स्थानांतरण जैसी कार्रवाई करना उचित नहीं है। जब सीसीटीवी फुटेज और चैट जैसे ठोस सबूत मौजूद हैं, तो दोनों आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सख्त होनी चाहिए थी। शिक्षक अनुशासन का प्रतीक होते हैं, जब वो ही खुद इस प्रकार की अनुचित हरकतें करेंगे तो ऐसे मामलों में हल्की कार्रवाई करना क्या उचित है?
विद्यालय प्रबंधन समिति ने भी शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए शिक्षकों की गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाए। समिति का कहना है कि विद्यालय शिक्षा और अनुशासन का केंद्र है, ऐसे में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या अनैतिक आचरण को बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विद्यालय परिसर में शिक्षकों की ऐसी हरकतों का छात्र-छात्राओं पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है।