उत्तराखंड हरिद्वारIllegal shrine demolished in Haridwar

उत्तराखंड: सिंचाई विभाग की दो बीघा जमीन पर बनी थी अवैध मजार, प्रशासन ने की ध्वस्त

हरिद्वार जिले में सिंचाई विभाग की लगभग दो बीघा भूमि पर बनी अवैध मजार को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया।

Illegal shrine demolished: Illegal shrine demolished in Haridwar
Image: Illegal shrine demolished in Haridwar (Source: Social Media)

हरिद्वार: हरिद्वार जिला प्रशासन ने सिंचाई विभाग की लगभग दो बीघा सरकारी भूमि पर बनी अवैध मजार को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। प्रशासन की ओर से यह कदम धामी सरकार के सख्त निर्देशों के बाद उठाया गया है, जिसमें सरकारी भूमि पर बने सभी अवैध धार्मिक ढांचों को हटाने का अभियान तेज़ी से जारी है।

Illegal shrine demolished in Haridwar

जानकारी के अनुसार, हरिद्वार जिले के रानीपुर कोतवाली क्षेत्र के पथरी रोह पुल के पास सिंचाई विभाग की लगभग दो बीघा सरकारी भूमि पर सालों पहले अवैध मजार बनाई गई थी। सिंचाई विभाग की ओर से अतिक्रमण की शिकायत मिलने के बाद संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय सीमा में कब्जा हटाने के निर्देश दिए थे। लेकिन निर्धारित समय समाप्त होने के बावजूद अवैध मस्जिद को नहीं हटाया गया। लेकिन हरिद्वार जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए मंगलवार यानि आज अवैध मजार को बुलडोजर से धवस्त कर दिया। इस दौरान जिला प्रशासन के साथ मौके पर भारी पुलिस फ़ोर्स भी तैनात रही, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

अतिक्रमण मुक्त सरकारी जमीन

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध धार्मिक निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने और राज्य की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के उद्देश्य से की जा रही है। हरिद्वार प्रशासन ने बताया कि जिले के सभी सरकारी विभागों को अपनी भूमि की पहचान कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में अवैध धार्मिक ढांचे या अतिक्रमण पाए पाए जाने पर इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।

जीरो टॉलरेंस नीति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में कहा था कि राज्य की मूल पहचान, संस्कृति और धार्मिक सौहार्द के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। धामी सरकार ‘लैंड जिहाद’, ‘लव जिहाद’ और ‘थूक जिहाद’ जैसी प्रवृत्तियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में कहीं पर भी अवैध धार्मिक निर्माण या कब्जा मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए। यह कदम किसी धर्म या समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि कानून के तहत समान कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है।

ये भी पढ़ें: