उत्तराखंड हरिद्वारCyber Fraud in Roorkee Uttarakhand

उत्तराखंड: गूगल पर मिला डॉक्टर का नंबर, कॉल किया तो साइबर ठगों ने अकाउंट से लूट ली जमा पूंजी

रुड़की में एक व्यक्ति ने अपनी मां के इलाज के लिए गूगल से लिए डॉक्टर के नंबर पर कॉल किया, उसके बाद साइबर ठगों ने अकाउंट से जमा पूंजीलूट ली..

Cyber Fraud in Roorkee: Cyber Fraud in Roorkee Uttarakhand
Image: Cyber Fraud in Roorkee Uttarakhand (Source: Social Media)

हरिद्वार: रुड़की क्षेत्र में साइबर अपराध का एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस वारदात का तरीका इतना साधारण और आम उपयोग में आने वाला है कि कोई भी व्यक्ति आसानी से इसका शिकार हो सकता है।

Cyber Fraud in Roorkee Uttarakhand

जानकारी के अनुसार रुड़की के पिरान कलियर थाना क्षेत्र के बाजुहेड़ी गांव निवासी जितेंद्र ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वो अपनी मां के इलाज के लिए रुड़की के एक प्रसिद्ध डॉक्टर से संपर्क करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने गूगल पर डॉक्टर का मोबाइल नंबर खोजा, फिर गूगल पर मिले नंबर पर फोन कॉल लगाई। कॉल रिसीव करने वाले व्यक्ति ने खुद को उक्त डॉक्टर का सहायक बताया और इलाज संबंधी जानकारी देने के नाम पर जितेंद्र को एक लिंक भेज दिया। लिंक को व्हाट्सऐप पर भेजकर उनसे एक एप डाउनलोड करने के लिए कहा गया।

एक लाख रुपये की साइबर ठगी

जितेंद्र ने जैसे ही उस लिंक पर क्लिक कर एप डाउनलोड किया, उनका मोबाइल नंबर हैक हो गया। दुर्भाग्य से वही नंबर उनकी मां के सिविल लाइन रुड़की स्थित बैंक खाते से पंजीकृत था। मोबाइल पर नियंत्रण मिलते ही साइबर ठगों ने तुरंत 50-50 हजार के दो अलग-अलग यूपीआई ट्रांजैक्शन किए। जिसके बाद पीड़ित के खाते से कुल एक लाख रुपये खाते से गायब हो गए। जितेंद्र ने बताया कि जैसे ही उन्हें खाते से निकासी की जानकारी लगी, उन्होंने तुरंत बैंक से संपर्क किया। बैंक अधिकारियों ने मामले को गंभीर साइबर धोखाधड़ी बताते हुए खाते को अस्थायी रूप से सुरक्षित कर दिया, ताकि आगे कोई और लेनदेन न हो सके। पीड़ित की तहरीर के आधार पर कलियर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मामले की जांच जारी

थानाध्यक्ष रविंद्र कुमार ने बताया कि— “यह एक गंभीर साइबर धोखाधड़ी का मामला है। पीड़ित द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस द्वारा कॉल नंबर, यूपीआई ट्रांजैक्शन और भेजे गए एप लिंक की विस्तृत जांच की जा रही है।” पुलिस टीम अब साइबर ठगों के डिजिटल फुटप्रिंट खंगालकर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।