देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में रिस्पना और बिंदाल नदी पर प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। परियोजना के लिए जारी भू-अधिग्रहण अधिसूचना को लेकर अब जन संगठनों और विपक्षी दलों का विरोध तेज हो गया है। विरोध करने वालों का आरोप है कि सरकार परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी कर रही है और जनता की आपत्तियों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
Rispana-Bindal Elevated Road Project Faces Trouble
रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना के लिए जारी अधिसूचना पर दून समग्र विकास अभियान सहित कई जन संगठनों ने सवाल उठाए हैं। संगठनों का कहना है कि इस परियोजना को जनहित बताकर आगे बढ़ाया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि भू-अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत जरूरी प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। विरोध करने वालों ने आरोप लगाया कि परियोजना के लिए अनिवार्य सामाजिक असर मूल्यांकन (Social Impact Assessment) और जनसुनवाई जैसी प्रक्रिया को केवल औपचारिकता बनाकर छोड़ दिया गया।
पर्यावरण और बाढ़ खतरे पर अध्ययन न होने का दावा
जन संगठनों का कहना है कि सरकार ने अब तक परियोजना से जुड़ी कई अहम चिंताओं पर कोई ठोस अध्ययन सार्वजनिक नहीं किया है। जिनमें नदी तंत्र पर प्रभाव, पर्यावरणीय नुकसान की आशंका, बाढ़ और जलभराव का खतरा, मसूरी और मसूरी रोड पर संभावित असर और प्रदूषण व ट्रैफिक दबाव में बढ़ोतरी जैसी समस्याएं शामिल हैं। आरोप है कि बिना वैज्ञानिक आधार और व्यापक जानकारी के भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई, जिससे जनता में नाराजगी बढ़ रही है। दून समग्र विकास अभियान ने दावा किया कि सामाजिक असर मूल्यांकन के नाम पर किसी तकनीकी या वैज्ञानिक अध्ययन की जगह आम लोगों से अनुमान आधारित राय ली गई।
तथाकथित विशेषज्ञ रिपोर्ट में गंभीर खामियां
संगठनों का कहना है कि जिस तथाकथित विशेषज्ञ रिपोर्ट का हवाला दिया जा रहा है, उसमें भी—
बाढ़, प्रदूषण और पर्यावरणीय प्रभावों के ठोस आंकड़े नहीं हैं
रिपोर्ट में मुख्य रूप से भूमि संबंधी विवरण ही शामिल हैं
परियोजना की दीर्घकालिक चुनौतियों पर स्पष्टता नहीं है।
“जनता की आपत्तियों को दबाकर अधिसूचना जारी करना जनविरोधी”
विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि जब लगभग हर सप्ताह परियोजना के खिलाफ आवाज उठ रही है, तब भी जनता की आपत्तियों को दबाकर और कानूनी प्रावधानों को नजरअंदाज कर भू-अधिग्रहण अधिसूचना जारी करना जनविरोधी कदम है। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया से प्रशासन और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं और यदि यही रवैया जारी रहा तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
पर्यावरण और जनहित के खिलाफ कदम
रिस्पना और बिंदाल नदी पर प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर देहरादून में माहौल लगातार गर्म हो रहा है। एक तरफ सरकार इसे शहर की यातायात समस्या का समाधान बताती है, वहीं दूसरी ओर जन संगठन इसे पर्यावरण और जनहित के खिलाफ कदम मान रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन विरोध को कैसे संभालता है और क्या परियोजना पर आगे बढ़ने से पहले पारदर्शी अध्ययन और जनसुनवाई की प्रक्रिया दोबारा मजबूत की जाती है या नहीं।