उत्तराखंड रामनगर17 years work delay in SDM office provoked self immolation attempt

उत्तराखंड: 17 साल से तहसील में लटका था काम, SDM कार्यालय के सामने व्यक्ति ने खुद को लगा दी आग

SDM कार्यालय के सामने एक व्यक्ति ने 17 साल पुराने विवाद और भ्रष्टाचार के आरोपों से परेशान होकर आत्मदाह का प्रयास किया, जिसे स्थानीय लोगों ने तुरंत रोक लिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर प्राथमिक जांच शुरू कर दी है।

self immolation attempt: 17 years work delay in SDM office provoked self immolation attempt
Image: 17 years work delay in SDM office provoked self immolation attempt (Source: Social Media)

रामनगर: तहसील परिसर के बाहर एक व्यक्ति ने सोमवार को आत्मदाह का प्रयास किया, जिसे आसपास मौजूद लोगों की त्वरित सक्रियता से रोका गया। यह घटना रामनगर के SDM कार्यालय के सामने हुई, जहाँ व्यक्ति ने 17 साल पुराने न्यायिक/प्रशासनिक विवाद और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अपनी जान लेने की कोशिश की। स्थानीय सूत्रों ने बताया कि युवक पिछले कई वर्षों से मानसिक व आर्थिक तनाव से जूझ रहा था और आज उसने इसी निराशा में यह कदम उठाया।

17 years work delay in SDM office provoked self immolation attempt

सूत्रों के अनुसार, आज दोपहर SDM कार्यालय परिसर के मुख्य द्वार के पास आक्रोशित व्यक्ति ने अपने ऊपर तेल डालकर खुद को आग लगाने की कोशिश की। ठीक उसी समय कुछ राहगीरों व स्थानीय लोगों ने देखा और तुरंत उसको रोक लिया। यदि वह आग पकड़ लेता तो बड़ा हादसा हो सकता था, लेकिन उपस्थित लोगों और प्रशासनिक कर्मचारियों के हस्तक्षेप से उसकी जान बचाई गई।

प्रशासन की नाकारी आत्मदाह के प्रयास का कारण

घटना स्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि युवक बार-बार 17 साल से लंबित रहे मामले और तहसीली भ्रष्टाचार का हवाला दे रहा था और उसने कहा कि अब और सहन नहीं कर सकता। समय रहते कुछ राहगीरों व स्थानीय लोगों ने देखा और तुरंत उसको रोक लिया, जिससे उसकी जान बच गई। आसपास उपस्थित लोगों, कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों ने मिलकर स्थिति को नियंत्रण में रखते हुए युवक को आत्मदाह से रोका और चिकित्सा सहायता के लिए उसे पास के अस्पताल तक पहुंचाया।

युवक का आरोप: सत्ताधारियों ने जीना मुश्किल कर दिया

बचाए गए व्यक्ति ने आक्रोश में बताया कि वह लंबे समय से प्रशासनिक सिस्टम, विशेषकर तहसील के दफ्तर में हो रहे कामकाज से अतृप्त और दुखी था। उसने SDM कार्यालय में भ्रष्टाचार, मनमानी व अपनी पुरानी प्रकरणों के निस्तारण में देरी का आरोप लगाया। वह कह रहा था कि पिछले 17 वर्षों से उसके कई मामले लंबित हैं और न्याय व जवाबदेही न मिलने से उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ चुकी है।

पुलिस का बयान: आत्मदाह प्रयास पर प्राथमिक जांच

स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस घटना की प्राथमिक जांच जारी है। पुलिस spokesman ने कहा कि व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य, उसके आरोपों और आरोपित प्रकरणों के विवरण की गहन जांच की जाएगी। पुलिस ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यदि कोई प्रशासनिक त्रुटि या भ्रष्टाचार का मामला सामने आता है तो उसे कानूनी रूप से निपटाया जाएगा।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस तरह के किसी भी नाजुक निर्णय से पहले परिवार, मित्रों या स्थानीय प्रशासन से बात करें तथा यदि जरूरत हो तो हेल्पलाइन व चिकित्सीय सहायता अवश्य लें।

विशेषज्ञों की राय: निराशा व लंबित मामलों का मानसिक प्रभाव

मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक चले न्यायिक या प्रशासनिक विवाद और बिना समाधान के लंबित मामलों का व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। निराशा, हताशा और अकेलेपन की भावना व्यक्ति को ऐसे आत्मघाती कदमों तक ले जा सकती है। ऐसे में परिवार, समाज और प्रशासन को आवश्यकता है कि वे समय पर सहायता, परामर्श और न्याय सुनिश्चित करें।

क्या यह अकेला मामला है?

ऐसे आत्महत्या या आत्मदाह के प्रयास दुर्लभ नहीं हैं—हाल ही में रामनगर क्षेत्र से जुड़ी अन्य घटनाओं में भी युवक से जुड़े मारपीट मामले आदि सामने आए हैं, जहां स्थानीय लोग पुलिस से न्याय की मांग कर रहे थे। हालांकि इस घटना का वीडियो या विस्तृत रिपोर्ट अभी तक सोशल मीडिया पर वायरल नहीं हुआ है, पुलिस ने इसे संज्ञान में लिया है और आगे की रिपोर्ट जारी करने का संकेत दिया है।