श्रीनगर गढ़वाल: जिस 'श्रीनगर की गंगा' का जिक्र गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों में भी है, श्रीनगर गढ़वाल में वो अलकनंदा नदी अवैध खनन के कारण विलुप्ति के गंभीर संकट से गुजर रही है। दिन-रात चल रही जेसीबी और ट्रकों की खुदाई से नदी का प्राकृतिक स्वरूप नष्ट हो चुका है। इससे पर्यावरण, जलस्तर और स्थानीय लोगों के जीवन पर गहरा असर पड़ रहा है, जबकि प्रशासन की चुप्पी चिंता बढ़ा रही है।
Illegal Mining Threatens Alaknanda River Existence in Srinagar Garhwal
उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल क्षेत्र में बहने वाली अलकनंदा नदी आज अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। कभी जहां अविरल और निर्मल जलधारा बहती थी, वहां अब सूखी रेत, गड्ढे और टूटी हुई नदी की सतह नजर आती है। अवैध खनन ने नदी के प्राकृतिक स्वरूप को पूरी तरह बदलकर रख दिया है।
दिन-रात खुदाई से खोखली हो रही नदी
स्थानीय लोगों के अनुसार, बीते कई महीनों से अलकनंदा नदी में लगातार जेसीबी मशीनों और भारी ट्रकों के जरिए खुदाई की जा रही है। रेत और बजरी निकालने के इस अवैध कारोबार ने नदी की गहराई और प्रवाह दोनों को प्रभावित किया है। नतीजा यह है कि नदी धीरे-धीरे भीतर से खोखली होती जा रही है।