देहरादून: उत्तराखंड सरकार प्रदेश में हेली कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में राज्य के उत्तरकाशी जिले की चिन्यालीसौड़ और चमोली जिले की गौचर हवाई पट्टी को लेकर एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। इन दोनों हवाई पट्टियों को लेकर भारतीय वायुसेना, रक्षा मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के बीच जल्द ही एक महत्वपूर्ण एग्रीमेंट होने जा रहा है।
Uttarakhand Airstrips to Be Leased to Defence Ministry
प्रस्तावित एग्रीमेंट के तहत चिन्यालीसौड़ और गौचर हवाई पट्टियों को एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (ALG) के रूप में नागरिक और सैन्य दोनों उपयोगों के लिए रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार को लीज पर ट्रांसफर किया जाएगा। इससे इन हवाई पट्टियों का ज्वाइंट फंक्शनल यूज़ संभव हो सकेगा।
फिक्स्ड विंग कनेक्टिविटी होगी आसान
इस समझौते के बाद भविष्य में देहरादून से चिन्यालीसौड़ और गौचर को फिक्स्ड विंग विमान सेवाओं से जोड़ना आसान हो जाएगा। वर्तमान में इन रूट्स पर हेलीकॉप्टर सेवाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन नई व्यवस्था से हवाई कनेक्टिविटी को और मजबूती मिलेगी।
पर्यटन, तीर्थाटन और आपदा प्रबंधन को मिलेगा लाभ
राज्य सरकार का फोकस केवल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है। इस योजना के लागू होने से पर्यटकों और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिलेगी, वहीं आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों में भी हेली सेवाएं अहम भूमिका निभाएंगी। खासकर उन इलाकों में, जहां सड़क मार्ग से पहुंचने में काफी समय लगता है या आपदा के दौरान रास्ते बाधित हो जाते हैं।
तीन जिलों पर भी विशेष फोकस
नागरिक उड्डयन विभाग प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों को हेली कनेक्टिविटी से जोड़ने पर जोर दे रहा है। वर्तमान में अल्मोड़ा, पौड़ी और चंपावत जिलों को हेली सेवाओं से जोड़ने के लिए विशेष योजना पर काम किया जा रहा है।
30 साल के लिए लीज पर दी जाएंगी हवाई पट्टियां
नागरिक उड्डयन विभाग के सचिव सचिन कुर्वे ने बताया कि चिन्यालीसौड़ और गौचर दोनों ही एडवांस लैंडिंग हवाई पट्टियां हैं। इन्हें लेकर रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायुसेना के साथ एग्रीमेंट को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है। इसके तहत इन हवाई पट्टियों को अगले 30 वर्षों के लिए रक्षा मंत्रालय को लीज पर दिया जाएगा।
एयरफोर्स संभालेगी तकनीकी संचालन
एग्रीमेंट के अनुसार, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC), सीएनएस सुविधा (Communication, Navigation, Surveillance) और टैक्सी वे और रनवे का ऑपरेशन व मेंटेनेंस भारतीय वायुसेना द्वारा किया जाएगा। वहीं, सिविल टर्मिनल बिल्डिंग्स का रखरखाव और ऑपरेशनल मेंटेनेंस राज्य सरकार के जिम्मे रहेगा।
हेली और सामरिक दोनों दृष्टि से होगा उपयोग
सचिन कुर्वे ने कहा कि यह एक यूनिक एग्रीमेंट होगा, जिसमें हेली कनेक्टिविटी और सामरिक उपयोग दोनों को ध्यान में रखा गया है। एयरफोर्स द्वारा ATC और CNS सुविधा उपलब्ध कराए जाने से देहरादून से इन क्षेत्रों की हेली कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।