देहरादून: उत्तराखंड सरकार समय-समय पर राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम देहरादून को विश्व स्तरीय सुविधाओं से लैस करने के दावे करती रही है। मुख्यमंत्री स्तर पर खेल अधोसंरचना को प्राथमिकता देने की बात कही जाती रही है। लेकिन, जमीनी स्थिति इन दावों से अलग नजर आई। स्टेडियम में खामियों के कारण देहरादून में होने वाला रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल मुकाबला अब यहां नहीं खेला जाएगा। हजारों करोड़ो का बजट खर्च करने के बाद भी ये स्टेडियम बड़े अंतरराष्ट्रीय या घरेलू मुकाबलों के बजाय कॉर्पोरेट लीग और अन्य आयोजनों तक सीमित रहा है।
Dehradun Stadium Unfit for Ranji Trophy Match
दरअसल, बीसीसीआई के पिच क्यूरेटर राकेश कुमार ने हाल ही में राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम देहरादून का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पिच की सतह असमान पाई गई, आउटफील्ड की स्थिति संतोषजनक नहीं रही। स्टेडियम में जल निकासी व्यवस्था कमजोर बताई गई, नियमित रखरखाव की कमी सामने आई। इन खामियों को देखते हुए बोर्ड ने स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात में यहां उच्च स्तरीय मुकाबला कराना जोखिम भरा हो सकता है।
अब इकाना स्टेडियम में होगा मुकाबला
सूत्रों के अनुसार, रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल अब लखनऊ के इकाना स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। बीसीसीआई के पिच क्यूरेटर द्वारा स्टेडियम की पिच और आउटफील्ड को उच्च स्तरीय मैच के लिए अनुपयुक्त पाए जाने के बाद मुकाबले को उत्तराखंड से लखनऊ के इकाना स्टेडियम में शिफ्ट करने का फैसला लिया गया है। इस मुकाबले में उत्तराखंड की टीम का सामना केएल राहुल की अगुवाई वाली कर्नाटक टीम से होना था, जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय अनुभव वाले खिलाड़ी शामिल हैं।
उत्तराखंड टीम ने रचा था इतिहास
उत्तराखंड की टीम ने क्वार्टर फाइनल में झारखंड को जमशेदपुर के कीनन स्टेडियम में एक पारी और छह रन से हराकर इतिहास रचा था। गेंदबाज मयंक मिश्रा और अभय नेगी के शानदार प्रदर्शन के दम पर टीम पहली बार रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल तक पहुंची थी। अगर यह मुकाबला देहरादून में होता तो राज्य के क्रिकेट प्रेमियों को शीर्ष खिलाड़ियों को करीब से देखने का मौका मिलता।
खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल
सेमीफाइनल मुकाबला देहरादून से हटने से स्थानीय युवाओं को प्रेरणा मिलने का अवसर छिन गया। इसके साथ ही पर्यटन को संभावित बढ़ावा नहीं मिल पाएगा। इससे राज्य की खेल पहचान को नुकसान पहुंचा है। यह फैसला उत्तराखंड के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी सवाल खड़े करता है।
मंत्री-अधिकारियों की चुपी
इस मामले पर खेल मंत्री रेखा आर्य और विशेष खेल सचिव अमित सिन्हा से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के पूर्व सचिव महिम वर्मा ने इस फैसले पर खेद जताया है। उन्होंने कहा कि स्टेडियम के उन्नयन के लिए प्रयास किए जाएंगे ताकि भविष्य में ऐसे अवसर हाथ से न निकलें।