उत्तराखंड देहरादूनRetired colonel cyber-cheated of Rs 11 lakh in Dehradun

देहरादून: सेना के जिस अधिकारी को कभी दुश्मन न छका सके, उस रिटायर्ड कर्नल से 11 लाख की साइबर ठगी

देहरादून में शेयर बाजार में निवेश का झांसा देकर साइबर ठगों ने रिटायर्ड कर्नल सुरेंद्र कुमार सिंह से 11.20 लाख रुपये ठग लिए। फर्जी व्हाट्सएप ग्रुप और मोबाइल एप के जरिए ठगी की गई। साइबर क्राइम पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Dehradun Cyber Fraud: Retired colonel cyber-cheated of Rs 11 lakh in Dehradun
Image: Retired colonel cyber-cheated of Rs 11 lakh in Dehradun (Source: Social Media)

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। शेयर बाजार में मोटे मुनाफे का झांसा देकर साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड कर्नल से लाखों रुपये ठग लिए। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम कंट्रोल थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

Retired colonel cyber-cheated of Rs 11 lakh in Dehradun

जानकारी के अनुसार देहरादून के पंकज विहार, शिमला बाईपास रोड निवासी रिटायर्ड कर्नल सुरेंद्र कुमार सिंह ने साइबर क्राइम थाने में दी तहरीर में बताया कि उन्हें वर्तिका आनंद नाम की महिला का फोन आया। उसने खुद को वेंचुरा सिक्योरिटीज लिमिटेड के सीईओ हेमंत की सहायक बताया और शेयर बाजार में निवेश पर बेहतर रिटर्न का भरोसा दिलाया। विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए 4 नवंबर 2025 को उन्हें एक व्हाट्सएप लिंक भेजा गया, जिसके जरिए वह “नेक्स्टजैन कैपिटल नेटवर्क” नामक व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ गए। इस ग्रुप में 148 सदस्य और आठ एडमिन मौजूद थे।

रोज शाम 8 बजे मिलती थी ‘विशेषज्ञ सलाह’

पीड़ित के अनुसार ग्रुप में प्रतिदिन शाम 8 बजे ‘हेमंत’ नामक व्यक्ति शेयर बाजार को लेकर विशेषज्ञ सलाह देता था। उसका मोबाइल नंबर और प्रोफाइल खुद को वेंचुरा सिक्योरिटीज का सीईओ दर्शाता था, जिससे ग्रुप के सदस्यों का भरोसा और मजबूत होता गया। 5 नवंबर 2025 को वर्तिका आनंद ने रिटायर्ड कर्नल को एक ‘वीआईपी व्हाट्सएप ग्रुप’ में जोड़ दिया, जो वन-टू-वन निवेश संवाद के लिए बनाया गया था। कुछ दिनों तक अन्य सदस्यों को भारी मुनाफा होता देख रिटायर्ड कर्नल ने भी निवेश का निर्णय ले लिया।

फर्जी मोबाइल एप के जरिए 11.20 लाख रुपये ठगे

साइबर ठगों ने उन्हें “वेंटसेक प्रो” नाम का मोबाइल एप डाउनलोड करवाया और लॉगइन आईडी-पासवर्ड उपलब्ध कराया। इसी एप के माध्यम से निवेश और बढ़ते मुनाफे का दिखावा किया गया। धीरे-धीरे अलग-अलग किस्तों में रिटायर्ड कर्नल से कुल 11 लाख 20 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। जब उन्होंने रकम निकालने की कोशिश की तो सभी संपर्क बंद हो गए। उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप से भी बाहर कर दिया गया। तब जाकर उन्हें एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।

साइबर क्राइम पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

साइबर क्राइम कंट्रोल पुलिस के एएसपी कुश मिश्रा ने बताया कि पीड़ित की शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जिन खातों में धनराशि ट्रांसफर की गई है, उनकी जांच की जा रही है और साइबर ट्रेल खंगाले जा रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक, निवेश स्कीम या व्हाट्सएप ग्रुप पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें।