रुद्रप्रयाग: रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ रूट पर स्थित काकड़ागाड़ क्षेत्र की सरकारी शराब की दुकान पर प्रिंट रेट से अधिक कीमत वसूलने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि निर्धारित मूल्य से ज्यादा रकम ली जा रही है। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय प्रशासन और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
Overrating at Kakragad liquor shop
जानकारी के अनुसार, बीयर पर 15 से 20 रुपये तक और शराब की बोतल व हॉफ पर 40 से 50 रुपये तक अतिरिक्त राशि वसूलने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से यह ओवररेटिंग का खेल जारी है, जिससे उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। मामले को लेकर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि अतिरिक्त वसूली की रकम आखिर किसके पास जा रही है और क्या संबंधित अधिकारी इस पर प्रभावी निगरानी कर पा रहे हैं या नहीं।
कई क्षेत्रों से मिल चुकी हैं शिकायतें
बताया जा रहा है कि रुद्रप्रयाग मुख्यालय स्थित ठेके पर भी इसी तरह की शिकायतें पहले सामने आ चुकी हैं। इसके अलावा तिलवाड़ा, नगरासू, मयाली, अगस्त्यमुनि और खेड़ाखाल क्षेत्रों की दुकानों में भी निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर शराब बेचे जाने के आरोप लगते रहे हैं। शराब उपभोक्ताओं द्वारा इस संबंध में सीएम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई है।
घटना का वीडियो वायरल
स्थानीय निवासी अंकित ने बताया कि जब वह काकड़ागाड़ की शराब दुकान पर बीयर खरीदने गए, तो उनसे 20 रुपये अतिरिक्त लिए गए। वहीं हॉफ बोतल पर 40 रुपये ज्यादा वसूले गए। जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो कथित रूप से दुकान कर्मचारी ने कहा, “लेना है तो लो, वरना चले जाओ।” अंकित के अनुसार, उनके साथी ने इस घटना का वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दुकानों पर तैनात कर्मचारी ग्राहकों से बदसलूकी भी करते हैं।
आबकारी विभाग ने दिए जांच के निर्देश
मामले में रमेश बंगवाल, आबकारी अधिकारी, ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि पूर्व में आई शिकायतों की भी जांच की गई थी और जहां अनियमितता पाई गई, वहां कार्रवाई की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में भी जांच पूरी कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन पर उठे सवाल
लगातार मिल रही ओवररेटिंग की शिकायतों ने प्रशासनिक निगरानी पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह उपभोक्ताओं के साथ सीधा आर्थिक शोषण माना जाएगा। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।
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