बागेश्वर: उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में पहले से ही दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण स्वास्थ्य सेवाएं चुनौतीपूर्ण रहती हैं। ऐसे में बागेश्वर जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां जिला अस्पताल सहित विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात 9 चिकित्सक और एक स्टाफ नर्स लंबे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहे हैं। इससे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने अब सख्त रुख अपनाते हुए अनुपस्थित कार्मिकों की सूची शासन को भेज दी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन सभी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
9 doctors and nurses absent from Bageshwar for a year
जिला अस्पताल बागेश्वर में तैनात हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष परगांई 1 मार्च 2025 से अनुपस्थित बताए जा रहे हैं। वहीं रेडियोलॉजिस्ट डॉ. आराधना नेगी 10 जून 2025 से ड्यूटी पर नहीं लौटी हैं। इसके अलावा चिकित्सा अधिकारी डॉ. भूपेंद्र घटियाली 15 अक्टूबर 2025 से गैरहाजिर हैं। डॉ. आशा मेहता और डॉ. अश्वनी मेहता भी लंबे समय से अस्पताल से गायब बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपस्थिति से अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्र भी प्रभावित
जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है।
अनु कोहली 11 मार्च 2025 से अनुपस्थित हैं।
डॉ. डिंपल भाकुनी 15 फरवरी 2025 से ड्यूटी पर नहीं आई हैं।
पीएचसी कौसानी में तैनात डॉ. ताहिर सलीम 1 सितंबर 2025 से गैरहाजिर हैं।
कपकोट में तैनात डॉ. देवेश गंगवार 6 जुलाई 2025 से अपने तैनाती स्थल पर नहीं पहुंचे।
स्टाफ नर्स प्रीति गोस्वामी 17 अक्टूबर 2025 से बिना सूचना अनुपस्थित हैं।
इन स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी के कारण ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
नोटिस के बावजूद नहीं दिया जवाब
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अनुपस्थित चिकित्सकों को कई बार नोटिस भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक किसी ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया है और न ही कार्यस्थल पर वापसी की है। विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कार्रवाई के लिए शासन को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी है।
मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा
हड्डी रोग विशेषज्ञ और रेडियोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति के कारण मरीजों को जांच और इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर पड़ रहा है, जिन्हें महंगे इलाज का खर्च उठाना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से अनुपस्थित रहने वाले सभी डॉक्टरों और स्टाफ नर्स के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। शासन स्तर पर इस मामले में जल्द फैसला लिया जा सकता है।