उत्तराखंड हरिद्वारLife imprisonment for man who killed live-in partner

उत्तराखंड: लिव इन पार्टनर की हत्या कर सूटकेस में छुपाया शव, अब उम्र भर जेल में सड़ेगा हैवान

सिडकुल शिवनगर कॉलोनी के चर्चित सूटकेस हत्याकांड में अदालत का फैसला। मुख्य आरोपी को आजीवन कारावास और सह-अभियुक्ता को पांच साल की सजा। जानें पूरा मामला।

Live-in partner murder case: Life imprisonment for man who killed live-in partner
Image: Life imprisonment for man who killed live-in partner (Source: Social Media)

हरिद्वार: सिडकुल क्षेत्र की शिवनगर कॉलोनी में चार साल पहले हुए चर्चित सूटकेस हत्याकांड में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मुख्य आरोपी रोहित को अपनी लिव-इन पार्टनर की हत्या का दोषी ठहराते हुए सश्रम आजीवन कारावास और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस जघन्य अपराध में साक्ष्य छिपाने और अपराधी की मदद करने की दोषी पाई गई सह-अभियुक्ता मंजू को पांच वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है।

Life imprisonment for man who killed live-in partner

दरअसल यह सनसनीखेज वारदात मई 2020 की है, जब देश कोरोना महामारी से जूझ रहा था। सिडकुल की एक फैक्ट्री में काम करने वाला रोहित अपनी लिव-इन पार्टनर सोनम उर्फ वर्षा के साथ शिवनगर कॉलोनी में रह रहा था। इसी मकान में मंजू नाम की महिला भी किराये पर रहती थी। जांच में सामने आया कि रोहित के दोनों महिलाओं के साथ संबंध थे। इसी को लेकर घर में अक्सर विवाद और तनाव की स्थिति बनी रहती थी। 24 मई 2020 की रात इसी त्रिकोणीय प्रेम प्रसंग और मानसिक तनाव के चलते रोहित ने मंजू के साथ मिलकर सोनम की बेरहमी से हत्या कर दी। वारदात के बाद शव को एक सूटकेस में बंद कर बाथरूम में छिपा दिया गया था। सूचना मिलने पर पुलिस ने सूटकेस बरामद कर पूरे मामले का खुलासा किया।

तकनीकी साक्ष्यों से सुलझी गुत्थी

मामले की जांच में तत्कालीन सिडकुल थाना प्रभारी और वर्तमान में हिंडोलाखाल थानाध्यक्ष लखपत सिंह बुटोला की भूमिका अहम रही। उनके नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों को जोड़ते हुए आरोपियों तक पहुंच बनाई। मुख्य आरोपी रोहित को तकनीकी लोकेशन के आधार पर कौशांबी (उत्तर प्रदेश) से गिरफ्तार किया गया, जबकि सह-अभियुक्ता मंजू को डेंसो चौक के पास से पहले ही दबोच लिया गया था। पुलिस ने अलग-अलग टीमें गठित कर लगातार दबिश दी और साक्ष्यों को मजबूत करते हुए अदालत में सटीक चार्जशीट दाखिल की।

12 गवाहों की गवाही के बाद सुनाया गया फैसला

न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाह पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने माना कि रोहित ने न केवल हत्या की, बल्कि साक्ष्य मिटाने का भी प्रयास किया। अदालत के इस फैसले को समाज में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। पुलिस की तत्परता और मजबूत विवेचना के चलते पीड़िता को आखिरकार न्याय मिल सका।