उत्तराखंड टिहरी गढ़वालStudent Declared Failed Turns Out to Have Passed

उत्तराखंड में कॉलेज ने उत्तीर्ण छात्रा को जबरदस्ती किया फेल, एक साल बर्बाद.. छात्रवृत्ति भी रुकी

बीएससी अंतिम वर्ष की एक छात्रा को मूल्यांकन त्रुटि के कारण फेल घोषित कर दिया गया, जबकि वह वास्तव में अच्छे अंकों से पास थी। आरटीआई के जरिए सच्चाई सामने आने के बाद विश्वविद्यालय की लापरवाही पर सवाल खड़े हो गए हैं।

ONSGDC Devprayag News: Student Declared Failed Turns Out to Have Passed
Image: Student Declared Failed Turns Out to Have Passed (Source: Social Media)

टिहरी गढ़वाल: ओंकारानंद सरस्वती राजकीय महाविद्यालय (ONSGDC) देवप्रयाग में मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़ी गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। बीएससी अंतिम वर्ष की एक छात्रा को विश्वविद्यालय द्वारा फेल घोषित कर दिया गया, जबकि वास्तविकता में वह अच्छे अंकों से उत्तीर्ण थी। इस त्रुटि का खुलासा छात्रा द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत उत्तर पुस्तिका प्राप्त करने के बाद हुआ।

Student Declared Failed Turns Out to Have Passed

जानकारी के अनुसार स्वर्गीय राम सिंह चौहान की पुत्री सुनीता ने हाईस्कूल 70 प्रतिशत और इंटरमीडिएट 65 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण किया। बीएससी के पहले दो वर्षों में भी उसका प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा और उसने औसतन 70 प्रतिशत अंक हासिल किए। मई 2025 में बीएससी छठे सेमेस्टर की परीक्षा देने के बाद जुलाई 2026 में घोषित परिणाम में उसे जूलॉजी विषय के ‘डेवलपमेंटल बायोलॉजी ऑफ वर्टिब्रेट्स’ प्रश्नपत्र में अनुत्तीर्ण दर्शाया गया। यह परिणाम उसके लिए पूरी तरह अप्रत्याशित था।

RTI से खुला सच

फेल घोषित होने के बाद सुनीता गहरे मानसिक तनाव में चली गई। हालांकि उसने हार नहीं मानी और सूचना के अधिकार के तहत अपनी उत्तर पुस्तिका मंगाने का निर्णय लिया। अगस्त 2026 में पहली बार आवेदन करने पर उसे कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद दिसंबर 2026 में दोबारा आवेदन किया गया। अंततः फरवरी 2026 में उसे उत्तर पुस्तिका उपलब्ध कराई गई। उत्तर पुस्तिका देखने पर चौंकाने वाला तथ्य सामने आया—जिस पेपर में उसे फेल दिखाया गया था, उसमें उसने 75 में से 49 अंक (लगभग 65 प्रतिशत) प्राप्त किए थे। यानी वह स्पष्ट रूप से उत्तीर्ण थी।

एक साल बर्बाद, छात्रवृत्ति भी रुकी

विश्वविद्यालय की इस गंभीर त्रुटि का खामियाजा सुनीता को भारी रूप से भुगतना पड़ा। वह डीएलएड (D.El.Ed) परीक्षा में शामिल नहीं हो सकी। फेल घोषित होने के कारण उसकी स्नातक स्तर की छात्रवृत्ति रोक दी गई। मानसिक तनाव और सामाजिक असहजता का सामना करना पड़ा। आर्थिक और भावनात्मक रूप से प्रभावित सुनीता अब न्याय की मांग कर रही है। उसका कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन तुरंत उसका परिणाम संशोधित करे, रुकी हुई छात्रवृत्ति जारी करे और लापरवाही के कारण हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करे।

मूल्यांकन और डेटा फीडिंग प्रणाली पर सवाल

इस मामले पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. नर्मदेश्वर शुक्ल ने कहा है कि यदि छात्रा आरटीआई के माध्यम से प्राप्त उत्तर पुस्तिका प्रस्तुत करती है, तो मामले को अग्रिम कार्रवाई के लिए विश्वविद्यालय को भेज दिया जाएगा। इस घटना ने विश्वविद्यालय की मूल्यांकन और डेटा फीडिंग प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। एक साधारण प्रशासनिक या तकनीकी त्रुटि ने एक मेधावी छात्रा का पूरा शैक्षणिक वर्ष प्रभावित कर दिया।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रशासन इस मामले में कितनी शीघ्र और ठोस कार्रवाई करते हैं, ताकि भविष्य में किसी अन्य छात्र को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।