रुद्रपुर: उत्तराखंड में बिजली दरों में 18.50% वृद्धि के प्रस्ताव पर रुद्रपुर में हुई जनसुनवाई में उपभोक्ताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। किसानों और उद्योग प्रतिनिधियों ने इसे अन्यायपूर्ण बताया। आयोग 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाली नई दरों पर अंतिम निर्णय सुझावों के आधार पर करेगा।
Proposal to increase electricity rates in Uttarakhand
Uttarakhand Electricity Regulatory Commission द्वारा रुद्रपुर विकास भवन सभागार में आयोजित जनसुनवाई में बिजली दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी पर उपभोक्ताओं की राय ली गई। 23 फरवरी को आयोजित इस सुनवाई में 17 उपभोक्ताओं ने अपनी आपत्तियां और सुझाव आयोग के समक्ष रखे।
18.50% टैरिफ वृद्धि का प्रस्ताव
राज्य की विद्युत कंपनियों UPCL, PTCUL, UJVNL और SLDC ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता टैरिफ में 18.50 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव रखा है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी।
किसानों और उद्योग जगत का विरोध
जनसुनवाई के दौरान किसान प्रतिनिधि ठाकुर जगदीश सिंह ने प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि कृषि उपभोक्ताओं पर 14 पैसे प्रति यूनिट और उद्योगों पर 19 पैसे प्रति यूनिट अ
आयोग का पक्ष: ऊर्जा प्रदेश में भी चुनौती
तिरिक्त भार डालने का प्रस्ताव अन्यायपूर्ण है। उनका कहना था कि पहले से आर्थिक दबाव झेल रहे किसान बढ़ी हुई दरें वहन करने में सक्षम नहीं हैं। उद्योग प्रतिनिधियों ने भी इसे प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए नुकसानदायक बताया।जनसुनवाई में आयोग के सदस्य (तकनीकी) प्रभात किशोर डिमरी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि हर वर्ष दर संशोधन से पहले उद्योग और कृषि क्षेत्र से व्यापक परामर्श किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड ऊर्जा उत्पादन वाला राज्य होने के बावजूद बढ़ती खपत और सीमित आपूर्ति के कारण वित्तीय संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है। हालांकि अन्य राज्यों की तुलना में दरें अभी भी संतुलित बताई गईं।
अब क्या होगा आगे?
आयोग ने स्पष्ट किया है कि विभिन्न जिलों में हो रही जनसुनवाई में प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद ही अंतिम दरें तय की जाएंगी। अब उपभोक्ताओं, किसानों और उद्योग जगत की निगाहें आयोग के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।
उत्तराखंड में प्रस्तावित 18.50% बिजली दर वृद्धि ने उपभोक्ताओं में चिंता बढ़ा दी है। जनसुनवाई के दौरान विरोध के स्वर तेज रहे। अंतिम फैसला आयोग द्वारा जनसुझावों और वित्तीय जरूरतों के संतुलन के आधार पर लिया जाएगा, जो राज्य की अर्थव्यवस्था और आम जनता दोनों पर असर डालेगा।