रुद्रप्रयाग: रुद्रप्रयाग जिले में पारंपरिक ढोल-दमाऊ वादकों ने स्थायी मानदेय की मांग को लेकर आवाज़ बुलंद की है। कलाकारों का कहना है कि वे वर्षों से सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही है।
Demand for Permanent Honorarium to Dhol-Damau Artists Rudraprayag
ढोल-दमाऊ उत्तराखंड की पारंपरिक लोकसंस्कृति का अहम हिस्सा हैं। शादी-ब्याह, धार्मिक अनुष्ठान, मेले और पारंपरिक पर्वों में इन वाद्यों की विशेष भूमिका रहती है। कलाकारों का कहना है कि उनकी कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। वादकों का कहना है कि उन्हें केवल कार्यक्रमों के दौरान ही पारिश्रमिक मिलता है, जो नियमित आय के लिए पर्याप्त नहीं है। कई कलाकारों ने सरकार से मांग की है कि उन्हें मासिक स्थायी मानदेय या विशेष सांस्कृतिक भत्ता दिया जाए, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
सरकार से हस्तक्षेप की अपील
कलाकारों ने उत्तराखंड सरकार से मांग की है कि लोक कलाकारों के संरक्षण के लिए ठोस नीति बनाई जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो नई पीढ़ी इस पारंपरिक कला से दूर हो सकती है।
सांस्कृतिक विरासत को बचाने की चिंता
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मांग का समर्थन किया है। उनका मानना है कि ढोल-दमाऊ केवल वाद्य नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा हैं। इन कलाकारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देना जरूरी है।