उधमसिंह नगर: सितारगंज के किच्छा बाईपास रोड स्थित मैसर्स अग्रवाल फ्लेक्सिबल पैकेजिंग में बाल श्रम का गंभीर मामला उजागर होने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। श्रम प्रवर्तन अधिकारी मीनाक्षी भट्ट ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए थाना प्रभारी सितारगंज को तहरीर सौंपी है।
Minor Injured in Factory Accident in Uttarakhand
तहरीर में बताया गया है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से सूचना मिलने पर जिला टास्क फोर्स टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की, जहां नाबालिग के फैक्ट्री में हेल्पर के रूप में काम करने की पुष्टि हुई। जांच में सामने आया कि 20 फरवरी को काम करते समय नाबालिग का दाहिना हाथ अचानक लेमिनेशन मशीन में आ जाने से गंभीर रूप से घायल हो गया था। टीम ने नाबालिग और उसके माता-पिता के बयान दर्ज किए तथा स्थल का निरीक्षण कर तथ्य जुटाए, जिसमें स्पष्ट पाया गया कि फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986, संशोधित 2016 की धारा 3(ए) का उल्लंघन करते हुए किशोर को कार्य पर लगाया गया था, जो कानूनन पूर्णतः प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है।
फैक्ट्री स्वामी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान चाइल्ड हेल्पलाइन से निकिता राणा और रेखा अधिकारी, आईएसडी एनजीओ से उवेश खान व संगीता गुप्ता तथा पुलिस विभाग से एएसआई ममता कुटयाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। श्रम विभाग ने फैक्ट्री स्वामी प्रिंस मित्तल पुत्र रामजी लाल मित्तल को नामजद करते हुए उसके खिलाफ अधिनियम की धारा 14 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने की संस्तुति की है। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में बाल श्रम के मुद्दे पर फिर से बहस तेज हो गई है और प्रशासन की निगरानी भी बढ़ा दी गई है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं की गई तो ऐसे मामलों से मासूम बच्चों की जिंदगी और भविष्य दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।
काटना पड़ सकता है दाहिने हाथ का अंगूठा
घायल बच्चे का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया है कि चोट इतनी गंभीर है कि उसके दाहिने हाथ का अंगूठा काटना पड़ सकता है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी और बच्चे या मजदूर के साथ ऐसा हादसा न हो।