देहरादून: उत्तराखंड में पहली बार स्कूल बस और स्कूल वैन के किराए को लेकर स्पष्ट नियम बना दिए गए हैं। राज्य परिवहन प्राधिकरण की बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया, जिसके बाद अब सभी स्कूलों को तय दरों के अनुसार ही छात्रों से परिवहन शुल्क लेना होगा। यह फैसला अभिभावकों को राहत देने और स्कूलों द्वारा मनमाने शुल्क पर रोक लगाने के उद्देश्य से लिया गया है।
Uttarakhand Sets Fixed School Bus and Van Fare
यह निर्णय नैनीताल हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद लिया गया है। जनहित याचिका के तहत कोर्ट ने स्कूल वाहनों के किराए को निर्धारित करने के आदेश दिए थे। इसके बाद परिवहन विभाग ने एक समिति गठित की, जिसने वाहन खर्च, ड्राइवर वेतन, ईंधन, बीमा, मेंटेनेंस सहित सभी पहलुओं का अध्ययन कर किराया तय किया।
स्कूल बस के लिए तय मासिक किराया
दूरी (प्रति दिन) मासिक शुल्क (₹ प्रति छात्र)
1 से 10 किमी :- 2200 रुपये
10 से 20 किमी :- 2700 रुपये
20 से 30 किमी :- 3200 रुपये
30 किमी से अधिक :- 3700 रुपये
स्कूल वैन के लिए तय मासिक किराया
दूरी (प्रति दिन) मासिक शुल्क (₹ प्रति छात्र)
1 से 5 किमी :- 2100 रुपये
5 से 10 किमी :- 2500 रुपये
10 से 20 किमी :- 3000 रुपये
20 किमी से अधिक :- 3500 रुपये
किन आधारों पर तय हुआ किराया?
किराया तय करते समय समिति ने कई महत्वपूर्ण खर्चों को ध्यान में रखा, जैसे:
वाहन की कीमत और EMI
चालक और परिचालक का वेतन
ईंधन खर्च
बीमा और मेंटेनेंस
परमिट और फिटनेस शुल्क
इन सभी पहलुओं को जोड़कर संतुलित किराया निर्धारित किया गया है।
अभिभावकों के लिए क्या बदलेगा?
अब अभिभावकों को मनमाना ट्रांसपोर्ट शुल्क नहीं देना पड़ेगा। सभी स्कूलों को तय मानकों के अनुसार ही फीस लेनी होगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ भी नियंत्रित रहेगा।
स्कूलों के लिए सख्त निर्देश
राज्य परिवहन प्राधिकरण ने साफ कर दिया है कि सभी शिक्षण संस्थानों को इन नियमों का पालन करना होगा। यदि कोई स्कूल तय शुल्क से अधिक वसूली करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
उत्तराखंड सरकार का यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल अभिभावकों को राहत मिलेगी, बल्कि स्कूल ट्रांसपोर्ट सिस्टम भी अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनेगा।