उत्तराखंड नैनीतालRetired Vice Chancellor cyber-cheated in name of gas booking

उत्तराखंड में गैस बुकिंग के नाम पर महाठगी, रिटायर्ड कुलपति के खाते से उड़ गए 1.91 लाख रुपये

जनपद नैनीताल की निवासी रिटायर्ड कुलपति को साइबर ठगों ने गैस बुकिंग के नाम पर 1.91 लाख रुपये की ठगी का शिकार बना लिया। स्क्रीन शेयरिंग के जरिए अकाउंट से पैसे ट्रांसफर कर लिए गए।

cyber fraud: Retired Vice Chancellor cyber-cheated in name of gas booking
Image: Retired Vice Chancellor cyber-cheated in name of gas booking (Source: Social Media)

नैनीताल: उत्तर प्रदेश के बरेली में स्थित Mahatma Jyotiba Phule Rohilkhand University की रिटायर्ड कुलपति को ठगों ने अपना शिकार बना लिया। मामूली गैस बुकिंग की कोशिश के दौरान शुरू हुई यह घटना देखते ही देखते 1 लाख 91 हजार रुपये की ठगी में बदल गई।

Retired Vice Chancellor Duped of ₹1.91 Lakh in Gas Booking Scam

जानकारी के अनुसार नैनीताल के मल्लीताल क्षेत्र की निवासी पीड़िता ने 20 मार्च को गैस बुकिंग के लिए भुगतान करने की कोशिश की, लेकिन ट्रांजेक्शन फेल हो गया। इसके बाद उन्होंने Paytm के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की। इसी दौरान उन्हें एक WhatsApp नंबर दिया गया, जिस पर संपर्क करने के बाद ठगों ने उन्हें अपने झांसे में ले लिया और फोन पर स्क्रीन शेयर करने को कहा। जैसे ही पीड़िता ने स्क्रीन शेयर किया, ठगों ने उनके बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर करना शुरू कर दिया। पहली ट्रांजेक्शन में 84,539 रुपये और दूसरी में 9,999 रुपये मोहम्मद फरहान नाम के खाते में भेजे गए। इसके बाद 21 मार्च को फिर से संपर्क कर 96,949 रुपये अंजली नाम के दूसरे खाते में ट्रांसफर करवा लिए गए।

लगातार आ रहे हैं संदिग्ध कॉल

ठगी का पता तब चला जब पीड़िता को लगातार बैंक से पैसे कटने के मैसेज मिलने लगे। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता का कहना है कि अभी भी उन्हें अज्ञात नंबरों से कॉल आ रहे हैं, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है। मामले की जानकारी मिलने के बाद कोतवाली प्रभारी Hem Chandra Pant ने बताया कि केस दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही साइबर सेल को भी अलर्ट कर दिया गया है ताकि आरोपियों को जल्द पकड़ा जा सके।

पहले भी हो चुकी हैं साइबर ठगी की शिकार

यह पहली बार नहीं है जब पीड़िता साइबर अपराधियों के निशाने पर आई हैं। इससे पहले अगस्त 2025 में भी उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर करीब 1.47 करोड़ रुपये की ठगी का सामना करना पड़ा था, जिससे यह साफ होता है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।