उत्तरकाशी: जनपद जिले के डोडीताल में स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर के कपाट विधि-विधान और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने का यह पावन अवसर भक्तों के लिए बेहद खास रहा, क्योंकि इस दौरान बर्फबारी ने पूरे क्षेत्र को सफेद चादर से ढक दिया। बर्फ से घिरे पहाड़ों के बीच भक्तों ने मां अन्नपूर्णा और भगवान गणेश के दर्शन कर आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया। यह दृश्य आस्था और प्रकृति के अनोखे संगम का प्रतीक बन गया।
Uttarkashi News: Dodital Annapurna Temple Opens for Devotees
इस धार्मिक यात्रा में शामिल होने के लिए श्रद्धालु अगोड़ा गांव से देव निशानों के साथ डोडीताल की ओर रवाना हुए। अस्सी गंगा घाटी और आसपास के कई गांवों से आए भक्तों ने बर्फबारी के बीच लगभग 15 से 16 किलोमीटर का कठिन पैदल सफर तय किया। ऊंचाई, ठंड और फिसलन भरे रास्तों के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई और वे पूरे उत्साह के साथ मंदिर तक पहुंचे। बैसाख माह की कृष्ण चतुर्थी के पावन दिन अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11 बजकर 15 मिनट पर मंदिर के कपाट विधिवत रूप से खोले गए। इस दौरान भक्तों ने पास स्थित पवित्र पार्वती सरोवर झील में स्नान कर पूजा-अर्चना की। झील के आसपास का वातावरण मंत्रोच्चार और भक्ति गीतों से गूंज उठा, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
चारधाम यात्रा से पहले क्यों होता है यह आयोजन
मंदिर के पुजारी के अनुसार हर वर्ष चारधाम यात्रा शुरू होने से लगभग 13 दिन पहले इस मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गवान गणेश की पूजा से की जाती है। इसी परंपरा को निभाते हुए चारधाम यात्रा के सफल संचालन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए यहां सबसे पहले गणेश जी की पूजा-अर्चना की जाती है। आगे पढ़िए..
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गणेश जन्मभूमि के रूप में प्रसिद्ध है डोडीताल
डोडीताल को भगवान गणेश की जन्मस्थली के रूप में भी जाना जाता है। यहां मां अन्नपूर्णा, जिन्हें माता पार्वती का स्वरूप माना जाता है, और भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों को धन, समृद्धि और संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही कारण है कि यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है।
6 महीने तक जारी रहेगी यात्रा
मंदिर के कपाट खुलने के बाद अब अगले छह महीनों तक श्रद्धालु यहां आकर दर्शन कर सकेंगे। इस अवधि में बड़ी संख्या में भक्त डोडीताल पहुंचकर मां अन्नपूर्णा और गणेश भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा यात्रा को सुचारू और सुरक्षित बनाने के प्रयास भी किए जाते हैं।
कैसे पहुंचे डोडीताल
उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से डोडीताल की दूरी लगभग 32 किलोमीटर है। यहां पहुंचने के लिए पहले 15 किलोमीटर तक वाहन से अगोड़ा गांव तक जाया जा सकता है। इसके बाद करीब 16 किलोमीटर का पैदल ट्रेक करना पड़ता है। इस रास्ते में प्राकृतिक सौंदर्य और पहाड़ों का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है, जो यात्रा को और भी खास बना देता है।