देहरादून: उत्तराखंड में मध्य हिमालय की ऊंची और खतरनाक ढलानों पर लटके अस्थिर ग्लेशियर अब बड़े खतरे के संकेत दे रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए National Green Tribunal (NGT) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और कई महत्वपूर्ण संस्थाओं से जवाब मांगा है।
NGT Raises Alarm Over Unstable Glaciers in Central Himalayas
वैज्ञानिक अध्ययनों और उपग्रह चित्रों के आधार पर यह आशंका जताई गई है कि ये ग्लेशियर कभी भी टूट सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो विनाशकारी Avalanche (हिमस्खलन) की स्थिति पैदा हो सकती है, जिसका असर निचले इलाकों तक पहुंच सकता है और बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है। अध्ययन में उत्तराखंड के कई संवेदनशील इलाकों को हाई रिस्क जोन में रखा गया है। इनमें प्रमुख रूप से Mana, Badrinath और Hanuman Chatti शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे खराब स्थिति में हिमस्खलन का प्रभाव इन क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। इस मामले में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं ने उपग्रह छवियों और एलिवेशन मॉडल का उपयोग करके हिमस्खलन के संभावित दायरे और उसके प्रभाव का आकलन किया है। इस अध्ययन ने यह संकेत दिया है कि भविष्य में यह खतरा और गंभीर हो सकता है, खासकर बदलते मौसम और ग्लेशियरों की अस्थिरता के कारण। आगे पढ़िए..
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NGT ने किन संस्थाओं से मांगा जवाब
NGT ने इस मामले में कई प्रमुख संस्थाओं को नोटिस जारी किया है। इनमें केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड और राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान शामिल हैं। सभी संबंधित पक्षों को अगली सुनवाई से पहले अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी बीच Badrinath के तप्त कुंड से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह वीडियो बदरीनाथ का नहीं है और गलत जानकारी फैलाने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी बताया गया कि तप्त कुंड में पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग स्नान की व्यवस्था है और वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
क्यों गंभीर है यह खतरा?
हिमालय क्षेत्र में बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर तेजी से अस्थिर हो रहे हैं। इससे अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाओं का खतरा भी बढ़ गया है। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह स्थिति गंभीर आपदा का रूप ले सकती है। अब सभी की नजर NGT की अगली सुनवाई पर है। उम्मीद की जा रही है कि इस मुद्दे पर ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों को संभावित खतरे से बचाया जा सके।