देहरादून: उत्तराखंड कैबिनेट ने वन विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई है, जिससे विभाग में भर्ती प्रक्रिया के नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं। इन फैसलों का असर वन दरोगा, वन आरक्षी और सांख्यिकीय अधिकारी जैसे पदों पर सीधा पड़ेगा। लंबे समय से लंबित मांगों को देखते हुए सरकार का यह कदम सुधार की दिशा में अहम माना जा रहा है।
Uttarakhand Forest Department Recruitment New Rules
उत्तराखंड कैबिनेट ने वन सांख्यिकीय सेवा नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत विभाग में खाली पड़े चार सांख्यिकीय अधिकारी पदों पर सीधी भर्ती के लिए नियमों को स्पष्ट किया गया है। पहले शैक्षणिक योग्यता और तकनीकी अनुभव को लेकर कुछ अस्पष्टता थी, जिसे अब दूर कर दिया गया है। इससे भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।
शैक्षणिक योग्यता में बदलाव
वन दरोगा के पद के लिए अब शैक्षणिक योग्यता बढ़ा दी गई है। पहले इस पद के लिए न्यूनतम योग्यता इंटरमीडिएट (12वीं) थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर स्नातक (ग्रेजुएशन) कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे विभाग में बेहतर और योग्य उम्मीदवारों की भर्ती होगी, जिससे वन प्रबंधन और संरक्षण कार्यों में सुधार आएगा। इस फैसले का वन दरोगा संगठन ने स्वागत किया है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी और अब इसे पूरा किया गया है। उनका मानना है कि योग्यता बढ़ने से विभाग में पेशेवर दक्षता बढ़ेगी और कार्य प्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी। आगे पढ़िए..
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आयु सीमा भी की गई निर्धारित
कैबिनेट ने वन दरोगा और वन आरक्षी के पदों के लिए आयु सीमा भी तय कर दी है। नए नियमों के अनुसार वन दरोगा के लिए आयु सीमा 21 से 35 वर्ष रखी गई है, जबकि वन आरक्षी के लिए 18 से 25 वर्ष निर्धारित की गई है। इससे भर्ती प्रक्रिया अधिक संतुलित और स्पष्ट होगी।
सुधार की दिशा में बड़ा कदम
सरकार के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य विभाग में कार्यक्षमता बढ़ाना और योग्य उम्मीदवारों को अवसर देना है। तकनीकी और शैक्षणिक मानकों को मजबूत करने से विभाग के कामकाज में गुणवत्ता बढ़ेगी और निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होगी। इन नए नियमों के लागू होने से भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और योग्य उम्मीदवारों की भागीदारी बढ़ेगी। साथ ही वन संरक्षण और प्रबंधन के कार्यों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।