चम्पावत: Uttarakhand में गुरुवार को हुई तेज बारिश ने एक तरफ भीषण गर्मी से राहत दिलाई, तो दूसरी ओर कई इलाकों में तबाही का मंजर भी देखने को मिला। सबसे ज्यादा असर Champawat जिले की बाराकोट तहसील के अंतर्गत बिसराड़ी गांव में देखा गया, जहां अचानक हालात बिगड़ गए।
Heavy Rain Triggers Flash Flood-Like Situation in Champawat
ग्रामीणों के अनुसार, महज दो घंटे की मूसलाधार बारिश ने पूरे गांव को झकझोरकर रख दिया। लोगों ने इसे “बादल फटने जैसे हालात” बताया है, हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बारिश के बाद उफान पर आए गधेरे ने गांव में भारी तबाही मचाई। तेज बहाव के साथ आए मलबे ने सड़क किनारे खड़े कई वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वे पूरी तरह दब गए और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी और मलबे का बहाव इतना तेज था कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
कई वाहनों को भारी नुकसान
इस घटना में दीवान नाथ, निर्मल नाथ और Khatima निवासी तेजू गोस्वामी के वाहन पूरी तरह नष्ट हो गए। इसके अलावा कई अन्य वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे लोगों को आर्थिक झटका लगा है। तेज बारिश और मलबे के चलते गांव के कई घरों की दीवारों में दरारें आ गईं और कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। इससे ग्रामीणों में डर और दहशत का माहौल बना हुआ है। बारिश का असर खेती पर भी साफ दिखाई दिया। आम और लीची के बगीचे बुरी तरह तबाह हो गए, जबकि खेतों में खड़ी फसलें भी बर्बाद हो गईं। पॉलीहाउस जैसी संरचनाएं भी इस आपदा की भेंट चढ़ गईं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। मलबा और तेज बहाव के कारण बिसराड़ी गांव को जोड़ने वाली सड़क पूरी तरह बंद हो गई है। इससे गांव का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से कट गया है और राहत व बचाव कार्यों में भी बाधाएं आ सकती हैं।
स्थानीय लोगों का बयान
ग्राम प्रधान निर्मल नाथ और पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख नंदा बल्लभ बगौली ने बताया कि महज दो घंटे की बारिश ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। उनकी मानें तो इतनी तेज बारिश पहले कम ही देखने को मिली है। इस गंभीर स्थिति के बावजूद राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, जिससे ग्रामीणों ने कुछ हद तक राहत की सांस ली। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द नुकसान का आकलन कर उन्हें मुआवजा दिया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। फिलहाल प्रशासन हालात को सामान्य करने और प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने में जुटा हुआ है।