उत्तराखंड रुद्रप्रयागThe crowd of pilgrims in Sonprayag has raised concerns

Chardham Yatra: केदारनाथ में श्रद्धालुओं की जान से खिलवाड़? एक्सपर्ट बोले- ‘ऐसे ही चला तो होगा विनाश’

चारधाम यात्रा में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से व्यवस्थाओं और पर्यावरण पर दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों ने कैरिंग कैपेसिटी खत्म किए जाने पर चिंता जताते हुए हिमालयी क्षेत्रों में भविष्य के खतरे की चेतावनी दी है।

Char Dham Yatra 2026: The crowd of pilgrims in Sonprayag has raised concerns
Image: The crowd of pilgrims in Sonprayag has raised concerns (Source: Social Media)

रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड चारधाम यात्रा में इस साल आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ रहा है। यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 19 अप्रैल से शुरू हुई चारधाम यात्रा में 10 मई तक यानी मात्र 22 दिनों में करीब साढ़े दस लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।

The crowd of pilgrims in Sonprayag has raised concerns

दरअसल, हाल ही में केदारनाथ यात्रा पड़ाव सोनप्रयाग से सामने आए वीडियो ने इस भीड़ की वास्तविक तस्वीर सबके सामने ला दी। वीडियो में हजारों श्रद्धालु एक साथ केदारनाथ धाम की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। इनमें बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और युवा सभी शामिल हैं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद चारधाम यात्रा की कैरिंग कैपेसिटी को लेकर फिर से बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बढ़ती भीड़ भविष्य में बड़े पर्यावरणीय और आपदाजनक संकट को जन्म दे सकती है।

ग्लोबल वार्मिंग और हिमालय पर बढ़ता दबाव

भारत समेत दुनिया भर में इस समय ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और ग्लेशियर झीलों का आकार भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे में उत्तराखंड के संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती भीड़ को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने से पर्यावरण पर दबाव बढ़ रहा है, जिसका असर आने वाले वर्षों में गंभीर रूप से देखने को मिल सकता है।

पहले लागू थी कैरिंग कैपेसिटी व्यवस्था

पिछले कुछ वर्षों में चारधाम यात्रा में लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए सरकार ने कैरिंग कैपेसिटी की व्यवस्था लागू की थी। इसका उद्देश्य था कि धामों में सीमित संख्या में श्रद्धालु पहुंचें, ताकि उन्हें बेहतर व्यवस्थाएं मिल सकें और पर्यावरणीय दबाव भी कम रहे। सरकार की पहले की व्यवस्था के अनुसार प्रतिदिन केदारनाथ धाम में 12 हजार, बदरीनाथ में 15 हजार, गंगोत्री में 7 हजार और यमुनोत्री धाम में 4 हजार श्रद्धालुओं को ही दर्शन की अनुमति थी। हालांकि इस वर्ष कैरिंग कैपेसिटी की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। वर्तमान में चारधामों में तय संख्या से लगभग दोगुनी भीड़ पहुंच रही है, जिससे व्यवस्थाओं पर भारी दबाव बढ़ गया है।

व्यवस्थाओं और पर्यावरण पर बढ़ रहा दबाव

कैरिंग कैपेसिटी समाप्त होने के बाद चारधाम यात्रा मार्गों पर ट्रैफिक जाम, लंबी कतारें और अव्यवस्था की स्थिति लगातार देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जरूरत से ज्यादा भीड़ कभी भी बड़े खतरे का कारण बन सकती है। अधिक संख्या में लोगों के पहुंचने से कूड़ा बढ़ रहा है, प्रदूषण फैल रहा है और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा वाहनों और कचरे से निकलने वाला ब्लैक कार्बन ग्लेशियरों पर जम रहा है, जिससे ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और उनकी मोटाई कम होती जा रही है।

क्लाइमेट एक्टिविस्ट ने जताई चिंता

क्लाइमेट चेंज एक्टिविस्ट आशीष गर्ग ने सरकार के इस कदम पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि किसी भी हिल स्टेशन या पर्वतीय क्षेत्र में कैरिंग कैपेसिटी से अधिक भीड़ पहुंचना विनाशकारी साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि अधिक भीड़ के कारण गर्मी बढ़ती है, ग्लेशियर पिघलते हैं और वेस्ट मैनेजमेंट की समस्या गंभीर हो जाती है। कूड़े के जलने से निकलने वाला ब्लैक कार्बन ग्लेशियरों पर जमकर उनके तेजी से पिघलने का कारण बन रहा है।
आशीष गर्ग का कहना है कि सरकार को कैरिंग कैपेसिटी की व्यवस्था समाप्त नहीं करनी चाहिए थी। उन्होंने चेतावनी दी कि हर साल हिमालयी क्षेत्रों की स्थिति और अधिक खराब होती जा रही है। ग्लेशियर पीछे खिसक रहे हैं और हरियाली भी लगातार कम हो रही है।

एनडीएमए और सरकार का पक्ष

चारधाम यात्रा में कैरिंग कैपेसिटी के मुद्दे पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य डॉ. दिनेश कुमार असवाल ने कहा कि यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू है और प्रतिदिन की संख्या तय कर यात्रा को मैनेज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के चेयरमैन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं यात्रा व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं, जिसके चलते काफी सुधार भी हुआ है।
डॉ. असवाल ने माना कि कैरिंग कैपेसिटी का पालन बेहद महत्वपूर्ण है और सरकार इस दिशा में कार्य कर रही है। आगे पढ़िए..

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पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने क्या कहा?

उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने भी कैरिंग कैपेसिटी को बेहद जरूरी बताया है। उनका कहना है कि धामों में जितनी जगह उपलब्ध है, उतने ही यात्रियों को वहां पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में सीमित स्थान होता है और वहां असीमित भीड़ की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि तीर्थ पुरोहितों और होटल कारोबारियों की ओर से यात्रा को पूरी तरह खुला रखने की मांग की जाती रही है। सतपाल महाराज ने कहा कि सरकार चाहती है कि चारधाम यात्रा सुरक्षित, व्यवस्थित और सरल तरीके से संचालित हो।

श्रद्धालुओं को दी गई जरूरी सलाह

सरकार और विशेषज्ञों ने यात्रियों, खासकर बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सीधे पहुंचने से हृदय पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए यात्रियों को रुक-रुक कर यात्रा करनी चाहिए और पर्याप्त आराम लेते हुए आगे बढ़ना चाहिए। इसके साथ ही यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने, पर्याप्त पानी पीने और मौसम को ध्यान में रखकर यात्रा करने की भी अपील की गई है।