पौड़ी गढ़वाल: कोट ब्लॉक स्थित वाड़ी गांव में घास लेने गई 59 वर्षीय महिला प्रभा देवी को गुलदार ने हमला कर मार डाला। गुलदार महिला को घसीटते हुए एक खंडहर मकान में ले गया। घटना के बाद गांव में दहशत फैल गई। वन विभाग और शूटरों ने जनसुरक्षा को देखते हुए कुछ ही घंटों में हमलावर गुलदार को मार गिराया। पौड़ी रेंज में पिछले सात महीनों में गुलदार के हमलों में सात लोगों की मौत हो चुकी है।
Leopard Kills Woman Collecting Fodder in Pauri Garhwal
उत्तराखंड के पौड़ी जनपद में गुलदार का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। कोट ब्लॉक के वाड़ी गांव में मंगलवार को एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। घास लेने गई एक महिला पर गुलदार ने हमला कर दिया और उसे घसीटते हुए पास के एक खंडहर मकान में ले गया। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोगों में भय का माहौल बन गया।
घास लेने गई महिला, लौटकर नहीं आई
जानकारी के अनुसार वाड़ी गांव निवासी 59 वर्षीय प्रभा देवी पत्नी मातबर सिंह मंगलवार दोपहर अपने पुराने मकान के पास घास लेने गई थीं। इसी दौरान घात लगाकर बैठे गुलदार ने उन पर हमला कर दिया। हमला इतना अचानक था कि महिला को संभलने का मौका तक नहीं मिला। प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों के अनुसार गुलदार महिला को घसीटते हुए पास के एक खंडहर मकान तक ले गया। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई।
गांव में फैली दहशत, मौके पर पहुंचे वन अधिकारी
महिला की मौत की खबर फैलते ही पूरे इलाके में दहशत फैल गई। ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की। गढ़वाल वन प्रभाग के डीएफओ महातिम यादव के अनुसार घटना के बाद गुलदार लगातार खंडहर के आसपास मंडरा रहा था, जिससे अन्य लोगों पर हमले की आशंका बनी हुई थी। वन विभाग की टीम ने पहले गुलदार को ट्रैंकुलाइज करने की कोशिश की, लेकिन हालात को देखते हुए जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई।
हमलावर हुआ गुलदार, शूटरों ने किया ढेर
वन विभाग के अनुसार जब शूटर मौके पर पहुंचे तो गुलदार अत्यधिक आक्रामक व्यवहार कर रहा था। अधिकारियों का कहना है कि गुलदार के हमलावर होने के कारण आत्मरक्षा और ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसे मार गिराया गया।
सात महीनों में सात लोगों की जान ले चुका है गुलदार
गढ़वाल वन प्रभाग की पौड़ी रेंज में गुलदार के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार बीते सात महीनों में गुलदार के हमलों में करीब सात लोगों की मौत हो चुकी है। ग्रामीण इलाकों में हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। कई गांवों में लोग समूह बनाकर ही खेतों और जंगलों की ओर जा रहे हैं। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।