देहरादून: उत्तराखंड में मानसून की आधिकारिक एंट्री अभी बाकी है, लेकिन उससे पहले ही मौसम का बदला हुआ मिजाज लोगों की चिंता बढ़ाने लगा है। मई और जून महीने में लगातार बारिश, तेज हवाओं और आकाशीय बिजली की घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इस बार मानसून प्रदेश के लिए कितना चुनौतीपूर्ण साबित होगा। पहाड़ों में मौसम की बढ़ती सक्रियता और बदलते जलवायु पैटर्न को देखते हुए विशेषज्ञ भी सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।
Monsoon Forecast for Uttarakhand: What to Expect This Season
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार देश के कई हिस्सों में मानसून पहुंच चुका है और अब यह तेजी से उत्तर भारत की ओर बढ़ रहा है। अनुमान है कि 25 जून के आसपास मानसून उत्तराखंड में दस्तक दे सकता है। हालांकि मानसून आने से पहले ही प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां काफी सक्रिय दिखाई दे रही हैं। लगातार हो रही बारिश और मौसम के अचानक बदलते स्वरूप ने लोगों और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। इस वर्ष मई का महीना उत्तराखंड के लिए असामान्य रहा। अधिकांश जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई। राजधानी देहरादून में एक दिन की भारी बारिश ने 86 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। आमतौर पर मई महीने में इतनी अधिक वर्षा देखने को नहीं मिलती, लेकिन इस बार लगातार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और अन्य मौसम प्रणालियों के कारण कई दौर की बारिश हुई। इसका असर पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में देखने को मिला।
जून में भी जारी है बारिश और तेज हवाओं का सिलसिला
जून महीने में भी मौसम की गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रदेश के कई इलाकों में लगातार बारिश दर्ज की जा रही है। इसके साथ ही तेज हवाओं और आकाशीय बिजली की घटनाओं में भी बढ़ोतरी देखी गई है। कई जिलों में पेड़ गिरने, बिजली लाइनों को नुकसान पहुंचने और यातायात प्रभावित होने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। यही वजह है कि मानसून शुरू होने से पहले ही लोगों के मन में संभावित आपदाओं को लेकर चिंता बढ़ने लगी है।
सामान्य से कम बारिश का अनुमान, लेकिन खतरा बरकरार
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष मानसून सीजन में उत्तराखंड में सामान्य से लगभग 5 से 8 प्रतिशत कम बारिश हो सकती है। पहली नजर में यह अनुमान राहत भरा दिखाई देता है, लेकिन मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कुल बारिश के आंकड़ों के आधार पर मानसून की गंभीरता का आकलन नहीं किया जा सकता। पिछले कुछ वर्षों में कम कुल वर्षा के बावजूद कई बार अत्यधिक बारिश की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है।
कम समय में भारी बारिश बन रही बड़ी चुनौती
हिमालयी पर्यावरण विशेषज्ञ प्रोफेसर एस.पी. सती के अनुसार अब मौसम का पारंपरिक स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले जहां बारिश लंबे समय तक धीरे-धीरे होती थी, वहीं अब कम समय में अत्यधिक वर्षा होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बादल फटना, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन जैसी घटनाएं बारिश की कुल मात्रा से नहीं, बल्कि उसकी तीव्रता और वितरण से तय होती हैं। यही कारण है कि कम बारिश का अनुमान होने के बावजूद आपदा का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता।
प्रशासन ने शुरू की व्यापक तैयारियां
संभावित चुनौतियों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं। उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार सभी जिलों में संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर ली गई है। फील्ड स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती के निर्देश जारी किए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
भूस्खलन और फ्लैश फ्लड वाले क्षेत्रों पर विशेष नजर
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में हर साल मानसून के दौरान भूस्खलन, सड़क अवरोध, बादल फटना और नदी-नालों के उफान जैसी घटनाएं सामने आती हैं। इस बार भी प्रशासन का विशेष फोकस संवेदनशील क्षेत्रों पर है। राहत एवं बचाव उपकरण, मशीनरी और आपदा प्रतिक्रिया दलों को पहले से तैयार रखा जा रहा है ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तेजी से कार्रवाई की जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी राज्यों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव तेजी से दिखाई दे रहा है। बढ़ते तापमान, ग्लेशियरों में बदलाव और मौसम प्रणालियों के असामान्य व्यवहार के कारण वर्षा का पैटर्न लगातार बदल रहा है। कभी लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति बनती है तो कभी कुछ घंटों की बारिश ही भारी तबाही का कारण बन जाती है। उत्तराखंड जैसे संवेदनशील पर्वतीय राज्य के लिए यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।
चारधाम यात्रा और पर्यटन पर भी रहेगी नजर
मानसून का प्रभाव चारधाम यात्रा, पर्यटन गतिविधियों और पहाड़ी परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक इन दिनों उत्तराखंड पहुंच रहे हैं, ऐसे में मौसम की हर गतिविधि पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। फिलहाल मौसम विभाग 25 जून के आसपास मानसून के प्रदेश में प्रवेश की संभावना जता रहा है, जबकि प्रशासन किसी भी संभावित चुनौती से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है।