उत्तराखंड देहरादूनSudden Hearing Loss Cases Rising in Dehradun

दून अस्पताल में बढ़ रहे हियरिंग लॉस के मामले, खत्म हो रही सुनने की क्षमता.. नजरअंदाज न करें ये लक्षण

देहरादून के दून अस्पताल में सेंसोरिन्यूरल हियरिंग लॉस (SNHL) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह एक गंभीर स्थिति है जिसमें अचानक या धीरे-धीरे सुनने की क्षमता खत्म हो सकती है।

SNHL Hearing Loss: Sudden Hearing Loss Cases Rising in Dehradun
Image: Sudden Hearing Loss Cases Rising in Dehradun (Source: Social Media)

देहरादून: सेंसोरिन्यूरल हियरिंग लॉस (SNHL) एक ऐसी मेडिकल स्थिति है जिसमें कान से मस्तिष्क तक ध्वनि संकेत पहुंचाने वाली नसें प्रभावित हो जाती हैं। इस स्थिति में व्यक्ति की सुनने की क्षमता आंशिक या पूरी तरह खत्म हो सकती है। विशेषज्ञ इसे “कान का दौरा” या “ईयर स्ट्रोक” भी कहते हैं।

Sudden Hearing Loss Cases Rising in Dehradun

देहरादून स्थित दून अस्पताल के ईएनटी विभाग की ओपीडी में हर महीने लगभग 20 मरीज इस बीमारी के लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार इनमें से कई मामलों में अचानक सुनने की क्षमता कम हो जाती है, जबकि कुछ मरीज धीरे-धीरे सुनने की समस्या लेकर आते हैं।

कैसे प्रभावित होती है कान की नसें?

विशेषज्ञों के अनुसार कान में मौजूद कोकलियर ऑडिटरी नर्व ध्वनि को मस्तिष्क तक पहुंचाने का कार्य करती है। जब यह नर्व किसी कारण से प्रभावित होती है, तो सुनने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है। इस प्रक्रिया में पहले कान के पर्दे पर असर पड़ता है, फिर आंतरिक कान की हड्डियों और द्रव में कंपन पैदा होता है। अंततः यह प्रभाव मस्तिष्क तक पहुंचकर सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

SNHL के मुख्य कारण

डॉक्टरों के अनुसार इस बीमारी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें लगातार तेज आवाज में रहना, लंबे समय तक हेडफोन का उपयोग, वायरल संक्रमण और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का सेवन शामिल है। इसके अलावा ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अचानक दबाव परिवर्तन भी इस समस्या को बढ़ा सकता है। आगे पढ़िए..

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विशेषज्ञों का कहना है कि SNHL किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन बच्चों में इसका खतरा अधिक होता है। इसका कारण बच्चों के कान की नाजुक संरचना है। जिन बच्चों को मस्तिष्क संबंधी संक्रमण या रूबेला जैसी बीमारियां हो चुकी हैं, उनमें इस बीमारी का जोखिम और बढ़ जाता है।

शुरुआती लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें

SNHL के शुरुआती लक्षणों में अचानक सुनाई कम देना, कान में आवाज गूंजना (टिनिटस) और चक्कर आना शामिल हो सकते हैं। कुछ मामलों में व्यक्ति को आवाज स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं देती। डॉक्टरों के अनुसार यदि 12 घंटे के भीतर इलाज मिल जाए तो सुनने की क्षमता को काफी हद तक बचाया जा सकता है।

समय पर इलाज बेहद जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी में देरी खतरनाक साबित हो सकती है। इसलिए किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज से मरीज की सुनने की क्षमता को वापस लाने की संभावना बढ़ जाती है।
देहरादून में बढ़ते सेंसोरिन्यूरल हियरिंग लॉस के मामले इस बात का संकेत हैं कि आधुनिक जीवनशैली, शोर प्रदूषण और लापरवाही हमारे स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहे हैं। समय रहते सावधानी और सही इलाज से इस समस्या से बचाव संभव है।