उत्तराखंड चमोलीBadrinath Donation Probe Expands After CCTV Review

बदरीनाथ चढ़ावा चोरी: 25 जून की CCTV फुटेज में सामने आए नए सुराग, अन्य कर्मचारी भी जांच के घेरे में

बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी मामले में पुलिस ने 25 जून की CCTV फुटेज खंगाली, जिसमें कई कर्मचारियों की संदिग्ध गतिविधियां सामने आई हैं। अब जांच का दायरा बढ़ाते हुए अन्य फुटेज और साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

Badrinath Temple Donation Scam: Badrinath Donation Probe Expands After CCTV Review
Image: Badrinath Donation Probe Expands After CCTV Review (Source: Social Media)

चमोली: उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले की जांच लगातार तेज होती जा रही है। अब इस मामले में बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के कई अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस द्वारा 25 जून की सीसीटीवी फुटेज की जांच के दौरान आरोपी कर्मचारी के साथ कुछ अन्य कर्मचारियों की गतिविधियां भी संदिग्ध दिखाई दी हैं। पुलिस ने संबंधित फुटेज को अपने कब्जे में लेकर जांच को और व्यापक बना दिया है।

Badrinath Donation Probe Expands After CCTV Review

जांच एजेंसियों के अनुसार, चढ़ावे की गणना के दौरान गणना कक्ष में मौजूद कर्मचारियों की गतिविधियों का बारीकी से विश्लेषण किया गया। फुटेज में आरोपी कर्मचारी के अलावा कुछ अन्य कर्मचारियों की गतिविधियां भी संदेह पैदा करने वाली प्रतीत हुईं। ऐसे में पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या कथित हेराफेरी में अन्य लोगों की भी कोई भूमिका रही है। सूत्रों के मुताबिक, यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो मामले में अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा सकती है।

अब 29 जून की CCTV फुटेज की होगी जांच

पुलिस जांच को आगे बढ़ाते हुए अब 29 जून की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग का भी परीक्षण कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि अलग-अलग दिनों की फुटेज का मिलान करने से घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकती है और संभावित आरोपियों की भूमिका सामने आ सकती है। आगे पढ़िए..

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जांच टीम विभिन्न तारीखों की रिकॉर्डिंग का तुलनात्मक विश्लेषण कर रही है ताकि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की पुष्टि की जा सके।

हाई रेजोल्यूशन कैमरों से मिल सकती है अहम जानकारी

जानकारी के अनुसार, बदरीनाथ मंदिर परिसर में 27 जून से हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इससे पहले लगे कैमरों की गुणवत्ता अपेक्षाकृत कम थी। इसी कारण पुलिस पुराने फुटेज को तकनीकी तरीके से बारीकी से खंगाल रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रिकॉर्डिंग में दिखाई देने वाली संदिग्ध गतिविधियां वास्तव में क्या थीं और उनमें शामिल कर्मचारी क्या कर रहे थे। मामले की जांच कर रहे पुलिस उपाधीक्षक मदन सिंह बिष्ट ने कहा कि जांच के दौरान जो भी तथ्य संदिग्ध पाए जाएंगे, उनकी गहनता से जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के अलावा अन्य तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं तथा जांच निष्पक्ष और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित हेराफेरी में कितने लोग शामिल थे और उनकी भूमिका क्या थी।