बागेश्वर: देवभूमि उत्तराखंड से लोगों का भावनात्मक जुड़ाव किस हद तक हो सकता है, इसकी एक मार्मिक मिसाल बागेश्वर में देखने को मिली। जापान में रहने वाली मियाको कैटलेट अपने दिवंगत पति की अंतिम इच्छा पूरी करने हजारों किलोमीटर दूर बागेश्वर पहुंचीं। उन्होंने विधि-विधान से अपने पति रॉबर्ट कैटलेट उर्फ वाजिद की अस्थियां पवित्र सरयू नदी में प्रवाहित कीं।
Japanese Woman Travels to Bageshwar to Fulfil Husband’s Last Wish
रॉबर्ट कैटलेट मूल रूप से अमेरिका के रहने वाले थे और अंग्रेजी के प्रोफेसर थे। उनका बागेश्वर से गहरा लगाव था। मृत्यु से पहले उन्होंने इच्छा जताई थी कि उनकी अस्थियां बागेश्वर की सरयू नदी में प्रवाहित की जाएं। पति की इच्छा को अपना संकल्प बनाकर मियाको जापान से बागेश्वर पहुंचीं। मंदिर के समीप पुजारी की मौजूदगी में करीब 45 मिनट तक मंत्रोच्चारण और पूजा-अर्चना हुई। इसके बाद रॉबर्ट की अस्थियां सरयू की पवित्र धारा में प्रवाहित की गईं।
योग शिविर में हुई थी दोनों की मुलाकात
रॉबर्ट और मियाको की मुलाकात वर्ष 2005 में एक योग साधना शिविर के दौरान हुई थी। उस समय मियाको जापान में अंग्रेजी की प्रोफेसर थीं। दोनों के बीच परिचय धीरे-धीरे गहरे रिश्ते में बदल गया। मियाको के आग्रह पर रॉबर्ट वर्ष 2007 में अमेरिका से जापान चले गए और वहीं अंग्रेजी के प्रोफेसर के रूप में काम करने लगे। वर्ष 2009 में दोनों ने विवाह कर लिया और जापान में साथ रहने लगे। आगे पढ़िए..
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बागेश्वर ने पहली नजर में बनाया दिल में स्थान
रॉबर्ट पहली बार बागेश्वर आए तो यहां की प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और आध्यात्मिक माहौल से बेहद प्रभावित हुए। वर्ष 2007 में जब वह मियाको के साथ दोबारा बागेश्वर पहुंचे, तो उन्होंने अपनी पत्नी को भी इस शहर से परिचित कराया। समय के साथ बागेश्वर से उनका जुड़ाव और गहरा होता गया। यही वजह रही कि उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा में भी इसी शहर की सरयू नदी को चुना।
2022 में ब्रेन हेमरेज के बाद हुआ निधन
वर्ष 2022 में रॉबर्ट को ब्रेन हेमरेज हुआ। लंबे उपचार के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। पति के निधन के बाद मियाको गहरे मानसिक आघात से गुजरीं, लेकिन उनके मन में रॉबर्ट की अंतिम इच्छा हमेशा बनी रही। उन्होंने तय किया कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, वह बागेश्वर पहुंचकर पति की इच्छा जरूर पूरी करेंगी।
सरयू में अस्थियां प्रवाहित करते समय भावुक हुईं मियाको
मियाको अपने पति की अस्थियां लेकर बागेश्वर पहुंचीं। पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चारण के बीच उन्होंने रॉबर्ट की अस्थियां सरयू नदी में प्रवाहित कीं। इस दौरान उनके परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे। जब अस्थियां सरयू की लहरों में विलीन हुईं तो यह पल मियाको के लिए बेहद भावुक था। उनकी यह यात्रा केवल जापान से भारत तक की दूरी तय करने की कहानी नहीं, बल्कि जीवनसाथी की आखिरी इच्छा को पूरा करने के लिए निभाए गए एक वचन की कहानी बन गई। मियाको का घरेलू नाम ताओमी है। अमेरिका से जापान और फिर बागेश्वर तक की उनकी यह भावुक यात्रा रॉबर्ट के देवभूमि से गहरे लगाव और पति-पत्नी के रिश्ते की एक यादगार कहानी बन गई।