उत्तराखंड चम्पावतInjured Villager Carried on a Doli in Champawat

उत्तराखंड: पहाड़ में विकास के दावों की खुली पोल, घायल को 4 घंटे पालकी में लेकर सड़क तक पहुंचे ग्रामीण

चंपावत के पाटी ब्लॉक के रज्यूड़ा गांव में सड़क सुविधा नहीं होने के कारण बैल के हमले में घायल कैलाश भट्ट को ग्रामीणों ने करीब चार घंटे तक डोली में बैठाकर सड़क तक पहुंचाया। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग की है।

Development Claims Exposed: Injured Villager Carried on a Doli in Champawat
Image: Injured Villager Carried on a Doli in Champawat (Source: Social Media)

चम्पावत: उत्तराखंड में विकास के दावों के बीच चंपावत जिले से सामने आई एक तस्वीर पहाड़ों की जमीनी हकीकत बयां कर रही है। पाटी विकासखंड के रज्यूड़ा गांव में सड़क सुविधा नहीं होने के कारण बैल के हमले में गंभीर रूप से घायल एक ग्रामीण को डोली के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ा। ग्रामीणों ने करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद घायल को सड़क तक पहुंचाया, जिसके बाद उसे निजी वाहन से हल्द्वानी उपचार के लिए भेजा गया।

Injured Villager Carried on a Doli in Champawat

ग्रामीणों के मुताबिक, साला रज्यूड़ा निवासी कैलाश भट्ट पुत्र पूर्णानंद भट्ट अपने बैलों को खेतों में चारा चुगाने ले जा रहे थे। इसी दौरान एक बैल ने उन पर सींग से हमला कर दिया। हमले में कैलाश गंभीर रूप से घायल हो गए और उनके शरीर से काफी रक्तस्राव होने लगा। हालत गंभीर होने पर ग्रामीणों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाने की तैयारी शुरू की। लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण घायल को अस्पताल ले जाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया।

कुर्सी की डोली बनाकर कंधों पर उठाया

सड़क सुविधा नहीं होने पर ग्रामीणों ने कुर्सी की मदद से डोली तैयार की और घायल कैलाश भट्ट को उसमें बैठाकर कंधों पर उठा लिया। इसके बाद ग्रामीण खड़ी चढ़ाई और दुर्गम पहाड़ी रास्तों से होते हुए सड़क की ओर निकल पड़े। उमस और कठिन रास्ते के बीच ग्रामीणों को कई बार रास्ते में रुककर आराम करना पड़ा। करीब चार घंटे बाद घायल को गागर की ग्रामीण सड़क तक पहुंचाया जा सका। वहां से निजी वाहन के जरिए उन्हें उपचार के लिए हल्द्वानी रवाना किया गया।

सड़क नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश

घायल को डोली में लेकर सड़क तक पहुंचाने के दौरान ग्रामीणों में शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना है कि रज्यूड़ा तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर वे कई बार अधिकारियों को ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। स्थानीय ग्रामीणों शंकर भट्ट, मोहन जोशी, नवीन जोशी, पीतांबर भट्ट, ललित, जीवन भट्ट, पुष्कर जोशी, लक्ष्मण दत्त उपाध्याय, टीकाराम उपाध्याय, खष्टी दत्त और भवानी दत्त ने सड़क निर्माण की मांग उठाई है।

चुनावी वादों पर भी ग्रामीणों ने उठाए सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि हर चुनाव में नेता गांव तक सड़क पहुंचाने का आश्वासन देते हैं और वोट मांगते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उनकी समस्या की सुध लेने कोई नहीं आता। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में बीमारी, दुर्घटना या किसी अन्य आपात स्थिति में मरीजों को इसी तरह डोली के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। उन्होंने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से रज्यूड़ा गांव तक जल्द सड़क निर्माण कराने की मांग की है।