रुद्रप्रयाग: जनपद रुद्रप्रयाग में स्ट्रीट डॉग का आतंक अब लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। रुद्रप्रयाग और अगस्त्यमुनि नगर क्षेत्रों में एक आक्रामक कुत्ते ने अलग-अलग स्थानों पर हमला कर 24 लोगों को काटकर घायल कर दिया। घायलों में बच्चे, महिलाएं और पुरुष शामिल हैं। कई लोगों के शरीर पर कुत्ते के काटने से गहरे घाव बताए जा रहे हैं। एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के कुत्ते के हमले का शिकार होने के बाद दोनों नगर क्षेत्रों में दहशत का माहौल है।
Rudraprayag Dog Attack Leaves 24 People Injured
जानकारी के अनुसार, रुद्रप्रयाग नगर क्षेत्र में कुत्ते ने 3 लोगों को घायल किया, जबकि अगस्त्यमुनि नगर क्षेत्र में इसी कुत्ते ने 21 लोगों पर हमला किया। आक्रामक कुत्ते ने अन्य कुत्तों को भी काटा, जिसके बाद उसके असामान्य व्यवहार को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ गई। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और नगर निकाय सक्रिय हुए। अगस्त्यमुनि नगर पंचायत ने पशुपालन विभाग की टीम और स्थानीय लोगों की मदद से हमलावर कुत्ते को पकड़ लिया।
निगरानी में रखा गया कुत्ता
कुत्ते को फिलहाल निगरानी में रखा गया है और चिकित्सकों की टीम उसकी जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा नगर क्षेत्र में घूम रहे अन्य स्ट्रीट डॉगों की भी निगरानी और जांच शुरू की गई है। आगे पढ़िए..
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नगर पंचायत अगस्त्यमुनि की अधिशासी अधिकारी निकिता भट्ट ने बताया कि स्थानीय लोगों और नगर पंचायत के सहयोग से हमलावर कुत्ते को पकड़ लिया गया है। चिकित्सकों की टीम से उसकी जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई होगी।
कुत्ते के काटने पर तुरंत करें ये काम
स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक डॉ. शिवांशु के अनुसार, कुत्ते के काटने के बाद घाव को तुरंत पर्याप्त साफ पानी और साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार टिटनेस का इंजेक्शन और अस्पताल में रेबीज रोधी टीका लगवाना चाहिए। घाव पर मिर्च पाउडर, तेल, मिट्टी या किसी भी घरेलू नुस्खे का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
स्ट्रीट डॉग की समस्या पर उठे सवाल
नगर क्षेत्र में एक ही कुत्ते द्वारा 24 लोगों को घायल किए जाने के बाद स्ट्रीट डॉग की समस्या से निपटने की नगर निकायों की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना के बाद एक-दो कुत्तों को पकड़ना स्थायी समाधान नहीं है। आवारा और आक्रामक कुत्तों की पहचान, निगरानी, नसबंदी और आवश्यक नियंत्रण के लिए नियमित अभियान चलाने की जरूरत है। खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की सुरक्षा को देखते हुए नगर क्षेत्रों में प्रभावी व्यवस्था की मांग उठ रही है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और नगर निकाय स्ट्रीट डॉग की समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं।