उत्तराखंड पौड़ी गढ़वालUttarakhand Villages Struggle for Roads and Bridges

उत्तराखंड: एक तरफ उफनती नदी, दूसरी तरफ गुलदार का डर... पहाड़ो में ऐसे स्कूल पहुंच रहे बच्चे

पौड़ी के गवाणी गांव में अगस्त 2025 में बहा पुल एक साल बाद भी नहीं बना। बच्चे उफनती मछलाड नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं। वहीं पिथौरागढ़ के हीपा गांव में सड़क न होने से बुजुर्गों ने बीमार महिला को कंधे पर अस्पताल पहुंचाया।

Uttarakhand Villages Struggle: Uttarakhand Villages Struggle for Roads and Bridges
Image: Uttarakhand Villages Struggle for Roads and Bridges (Source: Social Media)

पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड के पर्वतीय गांवों में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी आज भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। पौड़ी गढ़वाल के चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र में अगस्त 2025 में भारी बारिश के दौरान बहा पुल एक साल बाद भी नहीं बन पाया है। पुल नहीं होने के कारण स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर उफनती मछलाड नदी पार करनी पड़ रही है।

Uttarakhand Villages Struggle for Roads and Bridges

चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र के गवाणी गांव में ड्वीला मल्ला, ड्वीला तल्ला, देगला और तिमलपट समेत आसपास के गांवों को जोड़ने वाला पुल अगस्त 2025 में भारी बारिश के दौरान बह गया था। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बहने के बाद से ही नए पुल के निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन एक साल गुजरने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। बरसात में सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है।

नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे

पुल नहीं होने के कारण बच्चों के सामने स्कूल पहुंचने के लिए दो विकल्प हैं। पहला रास्ता उफनती मछलाड नदी से होकर गुजरता है, जबकि दूसरा घने जंगल से होकर जाता है। नदी के रास्ते से बच्चों को करीब 3 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। वहीं जंगल के रास्ते से यह दूरी बढ़कर करीब 5 किलोमीटर हो जाती है। जंगल में जंगली जानवर और गुलदार का खतरा भी बना रहता है। स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर बच्चों के लिए स्कूल जाना बेहद जोखिम भरा हो जाता है।

ग्रामीणों ने जल्द पुल बनाने की मांग की

स्थानीय निवासी बलवंत गुसाईं ने कहा कि पुल बहने के बाद से ग्रामीण लगातार सरकार और संबंधित विभाग से निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं ग्रामीण प्रमोद रावत ने कहा कि बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर विद्यालय जाना पड़ रहा है। उन्होंने क्षेत्रीय विधायक और लोक निर्माण विभाग मंत्री सतपाल महाराज से बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए पुल का निर्माण जल्द शुरू कराने की मांग की। आगे पढ़िए..

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पौड़ी की जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि बारिश से हुए नुकसान की भरपाई के लिए कार्रवाई की जा रही है। क्षतिग्रस्त पुल और रास्तों की रिपोर्ट प्राप्त की जा रही है और उसके आधार पर आवश्यक धनराशि स्वीकृत की जा रही है।

बुजुर्गों ने मरीज को कंधे पर पहुंचाया अस्पताल

पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क की समस्या का दूसरा उदाहरण पिथौरागढ़ के बेरीनाग विकासखंड स्थित हीपा गांव से सामने आया है। गांव में अब तक सड़क सुविधा नहीं पहुंची है। ऐसे में आपात स्थिति में ग्रामीणों को मरीजों को डोली या कंधे के सहारे अस्पताल तक पहुंचाना पड़ता है।

72 वर्षीय बीमार महिला को बुजुर्गों ने पहुंचाया अस्पताल

हीपा गांव निवासी 72 वर्षीय प्रतिमा देवी पीलिया से पीड़ित हैं। उनका एक सप्ताह तक बेरीनाग सीएचसी में उपचार चला था। 9 अगस्त को तबीयत दोबारा बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ी। गांव में सड़क नहीं होने और रोजगार के कारण अधिकांश युवाओं के बाहर रहने के चलते 55 से 62 वर्ष की उम्र के बुजुर्गों ने महिला को डोली के सहारे कंधों पर उठाया और अस्पताल पहुंचाया।

सड़क की मांग को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी

पूर्व सैनिक और ग्रामीण लक्ष्मण सिंह कार्की ने सड़क सुविधा नहीं होने पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में ग्रामीणों को हर बार इसी तरह जोखिम उठाना पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर हीपा गांव को सड़क सुविधा कब मिलेगी और ग्रामीणों को इस समस्या से कब निजात मिलेगी।

विधायक बोले- सड़क की स्वीकृति हो चुकी

गंगोलीहाट विधायक फकीर राम टम्टा ने बताया कि हीपा गांव के लिए पीएमजीएसवाई के तहत सड़क की स्वीकृति हो चुकी है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। पीएमजीएसवाई डीडीहाट के अधिशासी अभियंता सौरभ यादव ने भी कहा कि सड़क की स्वीकृति हो गई है और निर्माण से संबंधित प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने का कार्य शुरू किया जाएगा।